मॉडल से संन्यासी बनी हर्षा रिछारिया पर छिड़ा विवाद: संत समिति के अध्यक्ष बोले -परंपरा के खिलाफ; जांच की जाए 

Ujjain/Bhopal News: महाकुंभ 2025 के दौरान अपनी खूबसूरती और ग्लैमरस पृष्ठभूमि के कारण चर्चा में आईं मॉडल हर्षा रिछारिया अब आधिकारिक रूप से ‘स्वामी हर्षानंद गिरि’ बन चुकी हैं। उज्जैन के मौनी तीर्थ आश्रम में महामंडलेश्वर सुमनानंदजी महाराज द्वारा उन्हें दीक्षा दिलाई गई। हालांकि, इस संन्यास ने मध्य प्रदेश के संत समाज में एक बड़ी बहस और आक्रोश को जन्म दे दिया है।
“900 चूहे खाकर बिल्ली हज को नहीं जा सकती”
सूत्रो के अनुसार बताया जा रहा है कि मध्य प्रदेश संत समिति के अध्यक्ष महाराज अनिलानंद ने इस दीक्षा पर कड़ा ऐतराज जताया है। उन्होंने हर्षा के संन्यास को सनातन धर्म की मर्यादा के खिलाफ बताते हुए तीखा हमला किया। अनिलानंद ने कहा, “900 चूहे खाकर बिल्ली हज को नहीं जा सकती।” उन्होंने आरोप लगाया कि हर्षा ने पहले संन्यास का दावा किया और फिर सनातन धर्म के विरुद्ध अपमानजनक बातें कहीं। ऐसे में उनका अचानक संन्यासी बन जाना स्वीकार्य नहीं है।
जांच के घेरे में दीक्षा देने वाले गुरु
अनिलानंद महाराज ने केवल हर्षा पर ही नहीं, बल्कि उन्हें दीक्षा दिलाने वाले महामंडलेश्वर सुमनानंदजी महाराज पर भी सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने अखाड़ा परिषद से मांग की है कि:
  • इस पूरे घटनाक्रम की गहन जांच की जाए।
  • यह पता लगाया जाए कि क्या संन्यास की कठोर प्रक्रिया का पालन हुआ है।
  • सनातन परंपरा के साथ ‘खिलवाड़’ करने वालों पर सख्त कार्रवाई हो।
संत समिति का तर्क है कि संन्यास कोई तात्कालिक निर्णय नहीं, बल्कि बचपन से की जाने वाली कठोर साधना और अनुशासन का परिणाम है। उनके अनुसार, विवादित पृष्ठभूमि वाले व्यक्ति को सीधे उच्च पद या सम्मान देना धर्म का अपमान है।

Harsha Richhariya Sanyas: महाकुंभ 2025 की सबसे सुंदर साध्वी ने लिया  संन्यास, कौन हैं हर्षानंद गिरि? | Harsha Richhariya Sanyas, Mahakumbh Viral  Beautiful Sadhvi, becomes swami harshanand giri, Know ...

विवादों से पुराना नाता
हर्षा रिछारिया की पहचान एक स्टेज एंकर और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर के रूप में रही है। 4 जनवरी 2025 को प्रयागराज महाकुंभ में जब वे निरंजनी अखाड़े की पेशवाई में संतों के साथ रथ पर बैठी दिखीं, तभी से विवाद शुरू हो गया था। उस समय मीडिया ने उन्हें ‘सुंदर साध्वी’ का टैग दिया, जिस पर हर्षा ने पहले नाराजगी जताई और स्पष्ट किया कि वे केवल दीक्षा ले रही हैं, अभी साध्वी नहीं बनी हैं।
निजी पृष्ठभूमि और पक्ष
मूल रूप से झांसी की रहने वाली और अब भोपाल में बसी हर्षा के पिता बस कंडक्टर हैं। योग में विशेषज्ञता रखने वाली हर्षा का कहना है कि उन्होंने सुकून की तलाश में ग्लैमर की दुनिया छोड़ी है। उनके अनुसार, अब उनका जीवन धर्म और संस्कृति की सेवा के लिए समर्पित है।
फिलहाल, यह मामला अब संतों के बीच शक्ति प्रदर्शन और परंपरा की व्याख्या का केंद्र बन गया है। उज्जैन के आगामी आयोजनों को देखते हुए प्रशासन और अखाड़ा परिषद दोनों की नजर इस विवाद पर टिकी है।