बिहार में चला CM मोहन यादव का ‘जादू’, प्रचार वाली 26 में से 21 विधानसभा सीटों पर NDA को भारी बढ़त

Bihar Election:  बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के नतीजों में बिहार के सियासी रण में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के लिए एक तुरुप का इक्का साबित हुए हैं।

शुरुआती रुझानों के मुताबिक, सीएम यादव ने बिहार की जिन 26 विधानसभा सीटों पर NDA प्रत्याशियों के लिए प्रचार किया था, उनमें से 21 सीटों पर उम्मीदवार भारी बढ़त बनाए हुए हैं। यह आंकड़ा 80 प्रतिशत से ज्यादा का स्ट्राइक रेट दिखाता है, जो बिहार के जटिल जातीय समीकरणों में एक बड़ी सफलता मानी जा रही है।

मोहन यादव को बीजेपी ने एक खास रणनीति के तहत बिहार के चुनावी मैदान में उतारा था। उनका मुख्य लक्ष्य यादव बहुल इलाकों में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के पारंपरिक वोट बैंक में सेंध लगाना था। चुनाव परिणाम के रुझान इस बात की गवाही दे रहे हैं कि बीजेपी की यह रणनीति काफी हद तक कामयाब रही है।
यादव वोट बैंक साधने की रणनीति सफल
बिहार की राजनीति दशकों से जातीय समीकरणों पर केंद्रित रही है, जिसमें यादव मतदाता RJD का सबसे मजबूत आधार माने जाते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए बीजेपी ने मध्य प्रदेश के यादव मुख्यमंत्री मोहन यादव को स्टार प्रचारक के तौर पर बिहार भेजा। उन्होंने अपनी रैलियों और जनसभाओं में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकास कार्यों का जिक्र करते हुए स्थानीय मतदाताओं से जुड़ने की कोशिश की।
उन्होंने अपने भाषणों में अक्सर यह संदेश देने की कोशिश की कि बीजेपी सभी जातियों और समुदायों के विकास के लिए काम करती है। रुझानों से स्पष्ट है कि जिन इलाकों में मोहन यादव ने सभाएं कीं, वहां NDA उम्मीदवारों को फायदा मिलता दिख रहा है।
शानदार स्ट्राइक रेट ने बढ़ाया कद
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 26 में से 21 सीटों पर NDA की बढ़त मोहन यादव के बढ़ते राजनीतिक कद का प्रतीक है। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री बनने के बाद यह पहला मौका था जब उन्हें किसी दूसरे राज्य में इतनी बड़ी जिम्मेदारी दी गई थी। इस शानदार प्रदर्शन के बाद पार्टी में उनका कद और बढ़ सकता है।

यह सफलता न केवल बिहार में NDA की स्थिति को मजबूत करती है, बल्कि यह भी संकेत देती है कि मोहन यादव भविष्य में हिंदी पट्टी के अन्य राज्यों में भी बीजेपी के लिए एक महत्वपूर्ण ओबीसी चेहरा बन सकते हैं। उनका यह प्रदर्शन तेजस्वी यादव के नेतृत्व वाले महागठबंधन के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है।