Bhopal News: मध्य प्रदेश के लिए इस साल मानसून को लेकर चिंताजनक खबर सामने आ रही है। भारतीय मौसम विभाग (IMD), नई दिल्ली के ताजा अनुमान के मुताबिक, इस वर्ष प्रदेश में मानसून कमजोर रह सकता है और सामान्य से कम बारिश होने के संकेत हैं। जहां पिछले दो वर्षों (2024 और 2025) में प्रदेश ने रिकॉर्ड तोड़ बारिश देखी थी, वहीं इस बार अधिकांश जिलों में सूखे जैसे हालात या कम पानी गिरने की आशंका जताई गई है।
इंदौर-ग्वालियर में कम, तो भोपाल में मेहरबान रहेंगे बादल
मौसम विभाग के विश्लेषण के अनुसार, प्रदेश की सामान्य बारिश का औसत 37.3 इंच रहता है, लेकिन इस साल इसके 30 से 32 इंच (लगभग 90 से 95%) तक ही रहने का अनुमान है।
कम बारिश वाले संभाग: इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, चंबल, जबलपुर, रीवा, शहडोल, सागर और नर्मदापुरम संभाग में इस बार बादल कम बरसेंगे। विशेष रूप से इंदौर और ग्वालियर में सूखे के आसार बन रहे हैं।
सामान्य से अधिक बारिश: भोपाल संभाग के भोपाल, विदिशा और सीहोर जैसे जिलों में राहत की खबर है, यहाँ सामान्य या उससे अधिक पानी गिरने की संभावना है।
खेती और उत्पादन पर संकट के बादल
कम बारिश का सीधा असर प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ यानी कृषि पर पड़ सकता है। पिछले दो सालों में अच्छी बारिश के कारण सोयाबीन, गेहूं और चने के उत्पादन में प्रति हेक्टेयर भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई थी। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस साल बारिश कम होती है, तो न केवल फसलों के उत्पादन में गिरावट आएगी, बल्कि भविष्य में पेयजल और सिंचाई के लिए भी गंभीर जल संकट खड़ा हो सकता है।
10 सालों का लेखा-जोखा: कब कितनी हुई बारिश?
मध्य प्रदेश में पिछले कुछ सालों का मानसून काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा है:
सबसे कम बारिश: साल 2017 में केवल 29.9 इंच पानी गिरा था।
सबसे अधिक बारिश: साल 2019 में रिकॉर्ड 53 इंच बारिश दर्ज की गई थी।
हालिया ट्रेंड: साल 2024 (44.1 इंच) और 2025 (45.2 इंच) में प्रदेश ने कोटे से कहीं ज्यादा बारिश देखी थी।
मई के अंत में आएगी स्पष्ट तस्वीर
आईएमडी सोमवार को जारी किए गए इस अपडेट के बाद, मई के अंतिम सप्ताह में एक और संशोधित बुलेटिन जारी करेगा। उस समय मानसून की दिशा और सक्रियता को लेकर अधिक सटीक जानकारी मिल पाएगी। फिलहाल, कम बारिश के संकेतों ने किसानों और सरकार की चिंता बढ़ा दी है। प्रशासन को अभी से जल संरक्षण और सूखे से निपटने की कार्ययोजना पर विचार करना होगा।