MP Assembly Session: बजट बैठक का छठा दिन आज, अहम प्रस्तावों पर वोटिंग तय, सत्ता-विपक्ष टकराव से सदन में हंगामे की संभावना

मध्य प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र का आज सोमवार को छठा दिन है और सदन में राजनीतिक सरगर्मी तेज रहने के आसार हैं। कार्यसूची के अनुसार आज वित्तीय विषयों के साथ-साथ जनहित से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा और निर्णय की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। हाल ही में भाजपा और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच हुए प्रदर्शन और पत्थरबाजी की घटना को लेकर भी सदन में तीखी बहस और संभावित हंगामे की स्थिति बन सकती है। सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ही इस मुद्दे पर आमने-सामने आ सकते हैं।

आज सदन में विभिन्न विषयों पर ध्यानाकर्षण प्रस्ताव लाए जाएंगे। इनमें शासकीय महाविद्यालयों में रिक्त पदों को शीघ्र भरने की मांग प्रमुख है, क्योंकि लंबे समय से फैकल्टी और स्टाफ की कमी का मुद्दा उठता रहा है। इसके अलावा हाल में हुई ओलावृष्टि से किसानों की खराब हुई फसलों का आकलन और मुआवजे की प्रक्रिया को लेकर भी चर्चा प्रस्तावित है। राजधानी स्थित गांधी मेडिकल कॉलेज में छात्रा की संदिग्ध मौत का मामला भी सदन में गूंज सकता है। विपक्ष इस मामले में जवाबदेही तय करने और निष्पक्ष जांच की मांग कर सकता है।

प्रदेश के विभिन्न जिलों से जुड़े आधारभूत संरचना विकास कार्यों को लेकर भी आज महत्वपूर्ण कार्यवाही होगी। सड़क, पुल, सामुदायिक भवन, विद्युत उपकेंद्र और अन्य निर्माण परियोजनाओं से संबंधित कुल 73 याचिकाएं सदन के पटल पर रखी जाएंगी। इन प्रस्तावों पर चर्चा के बाद संबंधित विभागों को दिशा-निर्देश दिए जा सकते हैं, जिससे विकास कार्यों को गति मिल सके।

वित्तीय मामलों की बात करें तो वित्तीय वर्ष 2025-26 के तृतीय अनुपूरक बजट पर आज मतदान होना है। उप मुख्यमंत्री (वित्त) जगदीश देवड़ा सदन में प्रस्ताव प्रस्तुत करेंगे, जिसमें राज्य की संचित निधि से 15,958 करोड़ 79 लाख 30 हजार 85 रुपये की अतिरिक्त राशि स्वीकृत करने की मांग की जाएगी। इसी के साथ “मध्यप्रदेश विनियोग विधेयक, 2026” भी प्रस्तुत किया जाएगा। प्रस्ताव पारित होने के बाद विधेयक पर चर्चा और अनुमोदन की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। साथ ही वर्ष 2026-27 की अनुदान मांगों पर भी विचार-विमर्श और मतदान का कार्यक्रम तय है।

इससे पहले सत्र के दौरान इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पेयजल से हुई मौतों के मुद्दे पर सदन में तीखी नोकझोंक देखी जा चुकी है। कांग्रेस द्वारा लाए गए स्थगन प्रस्ताव पर व्यापक बहस और हंगामा हुआ था। अध्यक्ष ने यह व्यवस्था दी थी कि जो मामला न्यायालय या न्यायिक जांच के अधीन हो, उस पर सदन में विस्तृत चर्चा नहीं की जा सकती। बावजूद इसके विपक्ष ने मृतकों के परिजनों को दी गई सहायता राशि, संबंधित अधिकारियों की भूमिका और जवाबदेही जैसे विषयों पर चर्चा की मांग उठाई थी। ऐसे में आज भी सदन में राजनीतिक गर्माहट बने रहने की संभावना है।