एमपी शिक्षा विभाग का कड़ा आदेश, 7 दिन गैरहाजिर रहे तो नौकरी पर संकट, मंत्री ने दी सख्त चेतावनी

मध्यप्रदेश में शिक्षा विभाग ने उपस्थिति को लेकर सख्त रुख अपनाया है। भोपाल से 25 फरवरी को जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि बिना अनुमति एक दिन की अनुपस्थिति भी गंभीर अनुशासनहीनता मानी जाएगी और संबंधित कर्मचारी की सेवा समाप्ति तक की कार्रवाई की जा सकती है। विभाग का यह निर्देश सीधे तौर पर स्कूलों में नियमित कामकाज और दैनिक उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए जारी किया गया है।

आदेश के बाद जिला स्तर पर शिक्षा प्रशासन को उपस्थिति रिकॉर्ड पर कड़ी निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं। विभागीय लाइन यह है कि शिक्षण व्यवस्था में किसी भी स्तर पर खालीपन या अनियमितता से स्कूल संचालन प्रभावित होता है, इसलिए गैरहाजिरी को सामान्य प्रशासनिक चूक की तरह नहीं देखा जाएगा।

शिक्षा विभाग के इस कदम को स्कूल तंत्र में जवाबदेही बढ़ाने की कोशिश माना जा रहा है। विभाग ने संकेत दिया है कि उपस्थिति नियमों का पालन न करने वालों पर दंडात्मक कार्रवाई में ढील नहीं दी जाएगी। यानी अब उपस्थिति रजिस्टर, अवकाश स्वीकृति और दैनिक रिपोर्टिंग तीनों बिंदुओं पर सख्ती एक साथ लागू होगी।

आदेश का मुख्य बिंदु: बिना अनुमति अनुपस्थिति पर सीधी कार्रवाई

निर्देश का सबसे अहम हिस्सा यह है कि किसी भी कर्मचारी को अवकाश लेने से पहले सक्षम अधिकारी से अनुमति लेना अनिवार्य है। यदि कर्मचारी बिना पूर्व अनुमति अनुपस्थित रहता है, तो उसे प्रशासनिक रूप से ‘अनधिकृत अनुपस्थिति’ माना जाएगा। आदेश में यह भी कहा गया है कि ऐसी स्थिति में संबंधित अधिकारी सेवा समाप्ति की प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं।

इस प्रावधान ने संदेश दिया है कि विभाग अब उपस्थिति को औपचारिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि सेवा की मूल शर्त की तरह लागू करना चाहता है। यानी एक दिन की भी बिना सूचना गैरहाजिरी को हल्के में नहीं लिया जाएगा।

जिला शिक्षा अमले की जिम्मेदारी भी बढ़ी

आदेश में केवल कर्मचारियों के लिए ही नहीं, बल्कि निगरानी करने वाले अधिकारियों के लिए भी स्पष्ट जिम्मेदारी तय की गई है। जिला और ब्लॉक स्तर पर पदस्थ अधिकारी यह सुनिश्चित करेंगे कि सभी संस्थानों में उपस्थिति का रिकॉर्ड प्रतिदिन अपडेट रहे। जहां कहीं भी अनुपस्थिति मिले, वहां तुरंत रिपोर्ट तैयार कर नियम अनुसार कार्रवाई की जाए।

इस व्यवस्था का व्यावहारिक अर्थ यह है कि अब स्कूल स्तर पर दैनिक उपस्थिति और प्रशासनिक सूचना तंत्र को साथ-साथ चलाना होगा। विभाग चाहता है कि किसी कर्मचारी की गैरहाजिरी की जानकारी देर से नहीं, उसी दिन दर्ज हो और आवश्यक कार्रवाई समय पर शुरू हो।

स्कूल संचालन और कक्षाओं की निरंतरता पर फोकस

शिक्षा विभाग की दलील यह रही है कि स्कूलों में नियमित स्टाफ उपलब्ध रहना शिक्षण की निरंतरता के लिए जरूरी है। जब तैनात कर्मचारी बिना अनुमति अनुपस्थित रहते हैं, तो कक्षाएं, रिकॉर्ड प्रबंधन और विद्यार्थियों से जुड़े अन्य काम प्रभावित होते हैं। इसी वजह से उपस्थिति नियमों को कठोर बनाकर विभाग ने प्रशासनिक संदेश दिया है कि सेवा अनुशासन से समझौता नहीं होगा।

विभागीय स्तर पर यह भी माना जाता है कि स्पष्ट नियम होने से जिला प्रशासन के लिए निर्णय लेना आसान होता है। पहले जहां कई मामलों में देरी या अस्पष्टता रहती थी, वहां अब आदेश के आधार पर सीधे अनुशासनात्मक प्रक्रिया शुरू की जा सकती है।

कर्मचारियों के लिए क्या सावधानी जरूरी

नए निर्देश के बाद शिक्षा तंत्र से जुड़े कर्मचारियों के लिए सबसे जरूरी बात समय पर उपस्थिति और नियमसम्मत अवकाश प्रक्रिया है। यदि किसी कारण से ड्यूटी पर उपस्थित होना संभव न हो, तो पहले से लिखित या विभागीय प्रक्रिया के अनुसार अनुमति लेना जरूरी होगा। बाद में दी गई सूचना या मौखिक जानकारी को पर्याप्त नहीं माना जा सकता।

प्रशासनिक स्तर पर यह बदलाव सिर्फ दंडात्मक नहीं, बल्कि कार्यप्रणाली सुधार का हिस्सा भी माना जा रहा है। नियमित उपस्थिति, समय पर सूचना और रिकॉर्ड की पारदर्शिता पर जोर देकर विभाग स्कूल प्रबंधन को अधिक जवाबदेह बनाना चाहता है।

कुल मिलाकर, भोपाल से जारी यह आदेश मध्यप्रदेश के शिक्षा तंत्र में अनुशासन की नई रेखा खींचता है। संदेश साफ है—ड्यूटी में एक दिन की अनधिकृत अनुपस्थिति भी अब नौकरी पर सीधा असर डाल सकती है।