मोहन सरकार का बड़ा फैसला, मध्य प्रदेश के हर जिले में अब कार्यकर्ताओं की समस्याएं सुनेंगे बीजेपी विधायक

भोपाल: मध्य प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की सरकार ने संगठन को मजबूत करने और कार्यकर्ताओं की शिकायतों को दूर करने के लिए एक नई व्यवस्था लागू की है। अब प्रदेश के सभी जिलों में बीजेपी विधायक पार्टी कार्यालयों में बैठेंगे और कार्यकर्ताओं की समस्याएं सुनेंगे। इस पहल का उद्देश्य सरकार और संगठन के बीच बेहतर तालमेल बनाना और यह सुनिश्चित करना है कि कार्यकर्ताओं के काम प्रशासनिक स्तर पर न अटकें।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में सरकार बनने के बाद से ही संगठन को प्राथमिकता दी जा रही है। अक्सर यह शिकायतें मिलती थीं कि सत्ता में अपनी ही पार्टी होने के बावजूद कार्यकर्ताओं के जायज काम भी अफसरशाही के कारण नहीं हो पाते, जिससे उनमें निराशा बढ़ती है। इसी समस्या को खत्म करने के लिए यह कदम उठाया गया है।

कार्यकर्ताओं की सुनवाई के लिए नई व्यवस्था

पार्टी नेतृत्व द्वारा लिए गए इस निर्णय के अनुसार, अब हर जिले में एक रोस्टर तैयार किया जाएगा। इस रोस्टर के तहत हर दिन कोई न कोई विधायक या वरिष्ठ पदाधिकारी जिला बीजेपी कार्यालय में मौजूद रहेगा। वे वहां आने वाले पार्टी कार्यकर्ताओं से मिलेंगे, उनकी समस्याओं को सुनेंगे और संबंधित अधिकारियों से बात करके उनका तत्काल समाधान कराने का प्रयास करेंगे।

इस व्यवस्था का मुख्य लक्ष्य यह है कि कार्यकर्ताओं को अपने छोटे-छोटे कामों के लिए भोपाल या मंत्रियों के चक्कर न काटने पड़ें। स्थानीय स्तर पर ही उनकी समस्याओं का समाधान हो जाने से उनका मनोबल बढ़ेगा और वे पार्टी के लिए और अधिक ऊर्जा के साथ काम कर सकेंगे।

क्यों पड़ी इस पहल की जरूरत?

बीजेपी मानती है कि कार्यकर्ता ही संगठन की असली ताकत हैं। लेकिन कई बार सरकारी कामकाज, जैसे- ट्रांसफर, पोस्टिंग या अन्य विभागों से संबंधित मामलों में उन्हें अधिकारियों से अपेक्षित सहयोग नहीं मिलता। इससे उनमें असंतोष पैदा होता है, जिसका असर पार्टी के जमीनी कामकाज पर भी पड़ता है।

नई सरकार ने इस समस्या को गंभीरता से लिया है। यह पहल सुनिश्चित करेगी कि विधायकों के माध्यम से कार्यकर्ताओं की आवाज सीधे सरकार तक पहुंचे और उनकी समस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर हल किया जाए। यदि कोई मामला जिला स्तर पर हल नहीं होता है, तो विधायक उसे संबंधित मंत्री या मुख्यमंत्री कार्यालय तक ले जाएंगे।

संगठन और सरकार में बेहतर समन्वय

यह कदम सरकार और संगठन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे न केवल कार्यकर्ताओं की समस्याएं हल होंगी, बल्कि सरकार की योजनाओं को भी जमीनी स्तर तक पहुंचाने में मदद मिलेगी। विधायक जब सीधे कार्यकर्ताओं से जुड़ेंगे, तो उन्हें क्षेत्र की वास्तविक समस्याओं और जरूरतों की बेहतर जानकारी भी मिलेगी।

माना जा रहा है कि आगामी लोकसभा चुनाव से पहले पार्टी अपने संगठनात्मक ढांचे को पूरी तरह से दुरुस्त कर लेना चाहती है। कार्यकर्ताओं को संतुष्ट रखकर पार्टी चुनावी मैदान में पूरी ताकत से उतरने की तैयारी में है। यह व्यवस्था इसी रणनीति का एक अहम हिस्सा है।