भोपाल: मध्य प्रदेश में 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं का दौर शुरू होते ही साइबर ठगों के गिरोह सक्रिय हो गए हैं। ये ठग टेलीग्राम और वॉट्सऐप जैसे प्लेटफॉर्म पर असली प्रश्नपत्र देने का दावा कर छात्रों और अभिभावकों को निशाना बना रहे हैं। इसके लिए बाकायदा फर्जी चैनल बनाकर लिंक भेजे जा रहे हैं और पैसे की मांग की जा रही है।
इस तरह की गतिविधियों के बढ़ने के बाद राज्य साइबर क्राइम पुलिस ने छात्रों और अभिभावकों के लिए एक एडवाइजरी जारी की है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि यह पेपर लीक का दावा पूरी तरह से एक घोटाला है और छात्रों को इससे सावधान रहना चाहिए।
ऐसे काम करता है ठगों का नेटवर्क
साइबर अपराधियों का यह गिरोह हर साल परीक्षा के समय सक्रिय होता है। वे ‘MP Board Paper Leak’ या मिलते-जुलते नामों से टेलीग्राम पर चैनल बनाते हैं। इन चैनलों की प्रोफाइल फोटो और नाम इस तरह डिजाइन किए जाते हैं कि वे विश्वसनीय और असली लगें।
छात्रों का भरोसा जीतने के लिए वे कुछ सैंपल प्रश्न भी साझा करते हैं। असली पेपर देने का दावा कर वे छात्रों से ऑनलाइन पेमेंट प्लेटफॉर्म के जरिए 500 से 2000 रुपये तक वसूलते हैं। पैसे मिलने के बाद या तो वे छात्र को ब्लॉक कर देते हैं या फिर उन्हें कोई पुराना या मॉडल प्रश्नपत्र थमा देते हैं।
साइबर पुलिस की चेतावनी: न करें भरोसा
साइबर पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यह दावा पूरी तरह से फर्जी है। बोर्ड परीक्षाओं के प्रश्नपत्रों की सुरक्षा बेहद कड़ी होती है और उनका लीक होना लगभग असंभव है। ठग केवल छात्रों की घबराहट और परीक्षा के तनाव का फायदा उठाते हैं।
पुलिस ने छात्रों और अभिभावकों को सलाह दी है कि वे ऐसे किसी भी फर्जी लिंक पर क्लिक न करें और न ही किसी अनजान व्यक्ति को पैसे भेजें। इस तरह के झांसे में आने से न केवल आर्थिक नुकसान होता है, बल्कि छात्रों का कीमती समय और ध्यान भी भटकता है। अधिकारियों ने छात्रों से अपील की है कि वे अपनी पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करें और किसी भी शॉर्टकट के चक्कर में न पड़ें। यदि किसी को ऐसे फर्जी चैनलों की जानकारी मिलती है, तो उन्हें तुरंत इसकी सूचना साइबर पुलिस को देनी चाहिए।