मध्य प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र 2026 के पांचवें दिन भोपाल में सदन की कार्यवाही के दौरान सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय का मुद्दा प्रमुख रहा। इसी विषय पर चर्चा शुरू होते ही सत्ता पक्ष और कांग्रेस के बीच टकराव की स्थिति बनी। विरोध और नारेबाजी के कारण सदन का माहौल कई बार तनावपूर्ण रहा और कार्यवाही सुचारु ढंग से नहीं चल पाई।
दिन की शुरुआत नियमित कार्यसूची के साथ हुई, लेकिन विपक्ष ने विश्वविद्यालय से जुड़े निर्णयों, प्रक्रिया और प्राथमिकताओं पर सवाल उठाए। कांग्रेस सदस्यों ने इसे किसानों, कृषि शिक्षा और क्षेत्रीय संतुलन से जुड़ा मुद्दा बताते हुए सरकार से स्पष्ट जवाब मांगा। जवाबी पक्ष ने कहा कि सरकार कृषि ढांचे को संस्थागत रूप देने की दिशा में काम कर रही है।
सदन में बहस तेज होने के बाद नारेबाजी बढ़ी और अध्यक्ष को बार-बार व्यवस्था बनाने की अपील करनी पड़ी। हंगामे के बीच सरकारी पक्ष ने अपना पक्ष रखने की कोशिश जारी रखी, जबकि कांग्रेस ने प्रक्रिया पर आपत्ति दर्ज कराते हुए चर्चा को विस्तृत करने की मांग दोहराई। इस खींचतान का असर दिन की बाकी विधायी कार्यवाही पर भी पड़ा।
सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय को लेकर सरकार का तर्क था कि राज्य में कृषि शोध, प्रशिक्षण और स्थानीय फसली जरूरतों के अनुसार पाठ्यक्रम के विस्तार के लिए संस्थागत ढांचा जरूरी है। विपक्ष का कहना रहा कि ऐसे फैसलों में पारदर्शिता, वित्तीय स्पष्टता और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व का पूरा ख्याल रखा जाना चाहिए।
हंगामे के दौरान सत्ता पक्ष ने आरोप लगाया कि विपक्ष विकास संबंधी पहलों को राजनीतिक विवाद में बदल रहा है। दूसरी ओर कांग्रेस ने कहा कि वह नीति का विरोध नहीं, बल्कि निर्णय प्रक्रिया में जवाबदेही चाहती है। इस राजनीतिक टकराव के कारण कई सदस्यों को अपनी बात विस्तार से रखने का अवसर सीमित समय में ही मिल सका।
पांचवें दिन का एजेंडा और टकराव
बजट सत्र के पांचवें दिन वित्तीय और विभागीय विषयों के साथ कृषि से संबंधित बिंदु भी एजेंडे में शामिल रहे। सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय का मुद्दा आते ही सदन में शोर-शराबा बढ़ गया। विपक्ष ने इसे चर्चा का केंद्रीय विषय बनाया, जबकि सरकार चाहती थी कि कार्यसूची के अन्य बिंदुओं पर भी आगे बढ़ा जाए।
हंगामे के बीच कार्यवाही को व्यवस्थित करने के लिए सदन को बीच-बीच में रोकना पड़ा। बाद में कार्यवाही दोबारा शुरू होने पर भी माहौल पूरी तरह सामान्य नहीं हो सका। इससे यह संकेत मिला कि यह मुद्दा आने वाले दिनों में भी राजनीतिक रूप से प्रमुख रहेगा और बजट बहसों के साथ जुड़कर आगे बढ़ेगा।
सदन के भीतर हुई बहस में कृषि शिक्षा, अनुसंधान, संसाधन वितरण और संस्थागत ढांचे पर अलग-अलग दृष्टिकोण सामने आए। सरकारी पक्ष ने दीर्घकालिक लाभ का तर्क दिया, जबकि विपक्ष ने तत्काल प्रशासनिक स्पष्टता और जवाबदेही पर जोर रखा। दोनों पक्षों की प्राथमिकताएं अलग दिखीं, लेकिन विषय की गंभीरता पर असहमति नहीं थी।
राजनीतिक संकेत और आगे की दिशा
पांचवें दिन का घटनाक्रम यह भी दिखाता है कि बजट सत्र केवल वित्तीय दस्तावेजों तक सीमित नहीं है। नीति, संस्थान और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व जैसे मुद्दे सदन की राजनीति को प्रभावित कर रहे हैं। सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय पर उठा विवाद इसी व्यापक संदर्भ का हिस्सा माना जा रहा है।
विपक्ष के हंगामे ने सरकार को विस्तृत जवाब देने के लिए मजबूर किया, जबकि सरकार ने विपक्ष पर कार्यवाही बाधित करने का आरोप लगाया। यह स्थिति आगे भी बनी रही तो सत्र के अन्य महत्वपूर्ण विषयों की गति प्रभावित हो सकती है। फिलहाल दोनों पक्ष अपने-अपने राजनीतिक तर्कों के साथ इस मुद्दे को आगे बढ़ाने के संकेत दे रहे हैं।
बजट सत्र के अगले चरण में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय से जुड़े बिंदुओं पर सदन में औपचारिक रूप से कितनी प्रगति होती है। साथ ही यह भी तय करेगा कि सत्ता और विपक्ष के बीच संवाद का रास्ता बनता है या यह टकराव सत्र के शेष दिनों में भी जारी रहता है।
समग्र रूप से देखा जाए तो पांचवें दिन की कार्यवाही ने यह स्पष्ट कर दिया कि कृषि और शिक्षा से जुड़े संस्थागत फैसले अब विधानसभा की केंद्रीय राजनीतिक बहस का हिस्सा बन चुके हैं। भोपाल में चल रहे इस बजट सत्र में आगे की रणनीति, जवाबदेही और प्रक्रिया तीनों पर नजर बनी रहेगी।