नर्मदा नदी पर बड़ा खुलासा, बीजेपी विधायक ने सदन में पेश किए चौंकाने वाले आंकड़े, कई अहम दावे किए

मध्य प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र में पर्यटन, संस्कृति एवं धर्मस्व विभाग की अनुदान मांगों पर चर्चा के दौरान सरकार और विपक्ष के बीच कई मुद्दों पर विस्तार से बहस हुई। विपक्षी विधायकों ने लोक संस्कृति, लोक सभ्यताओं और लोक कलाकारों को अपेक्षित संरक्षण नहीं मिलने का आरोप लगाया। साथ ही विदेशी पर्यटकों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठाए गए। चर्चा में पुजारियों का मानदेय बढ़ाने और प्राचीन मंदिरों की मरम्मत के लिए पर्याप्त बजट देने की मांग भी सामने आई।

सत्तापक्ष की ओर से चर्चा में शामिल भाजपा विधायक अभिलाष पांडे ने नर्मदा नदी का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि पवित्र नर्मदा में गंदे नाले मिल रहे हैं और इन्हें रोकने के लिए प्रभावी व्यवस्था जरूरी है। उन्होंने विशेषज्ञों के हवाले से दावा किया कि पिछले वर्षों में नर्मदा के जल में 40 प्रतिशत कमी आई है। इसे उन्होंने प्रदेश के लिए गंभीर संकेत बताया, क्योंकि नर्मदा को मध्य प्रदेश की जीवनरेखा माना जाता है।

“विशेषज्ञों ने बताया है कि पिछले सालों में नर्मदा में 40 प्रतिशत जल कम हो गया है। यह खतरे की घंटी है क्योंकि नर्मदा मध्यप्रदेश की जीवनरेखा है।” — अभिलाष पांडे, विधायक

अभिलाष पांडे ने अपने वक्तव्य में जबलपुर महोत्सव शुरू करने की मांग भी रखी। इसके साथ उन्होंने जबलपुर का नाम जाबालि ऋषि के नाम पर रखने का प्रस्ताव भी सदन में रखा। इसी बहस में विधायक विपिन जैन ने मंदसौर के पशुपतिनाथ मंदिर लोक के दूसरे चरण के लिए 50 करोड़ रुपये देने की मांग की। एक अन्य विधायक ने शहडोल के विराट मंदिर के तिरछा हो जाने का मुद्दा उठाते हुए इसके तकनीकी सुधार और संरक्षण की जरूरत बताई।

मंत्री का जवाब: पर्यटन, धरोहर और मंदिर संरक्षण के आंकड़े

विभागीय मंत्री धर्मेन्द्र लोधी ने जवाब में कहा कि राज्य सरकार महिलाओं के लिए सुरक्षित पर्यटन स्थलों की अवधारणा पर काम कर रही है। उनके अनुसार पिछले वर्ष मध्य प्रदेश में 14 करोड़ से अधिक पर्यटक आए। उन्होंने यह भी बताया कि राज्य की 15 धरोहरों को यूनेस्को की अस्थायी सूची में शामिल कराया गया है, जबकि ओरछा को स्थायी सूची के लिए भेजा गया है।

मंत्री ने कहा कि अशासकीय सांस्कृतिक संस्थाओं को भी अनुदान दिया जा रहा है। धर्मस्व विभाग से जुड़े सवालों पर उन्होंने बताया कि प्रदेश में 22 हजार से अधिक शासन संधारित मंदिर हैं और इनके संरक्षण, संधारण व जीर्णोद्धार का काम जारी है। वर्ष 2025-26 में 21 करोड़ 86 लाख रुपये से 127 शासन संधारित मंदिरों का जीर्णोद्धार कराया गया। इसी अवधि में पुजारियों को 21 करोड़ 96 लाख रुपये का मानदेय दिया गया।

“प्रदेश में 22 हजार से अधिक शासन संधारित मंदिर हैं। इनके संरक्षण, संधारण और जीर्णोद्धार के लिए सरकार निरंतर काम कर रही है।” — धर्मेन्द्र लोधी, मंत्री

धर्मेन्द्र लोधी ने यह भी कहा कि तानसेन समारोह का आयोजन इस बार भव्य रूप में किया गया। विपक्ष की ओर से आए आरोपों पर सरकार ने दावा किया कि सांस्कृतिक संस्थाओं, धार्मिक स्थलों और पर्यटन गतिविधियों को संतुलित रूप से समर्थन दिया जा रहा है। हालांकि विपक्षी सदस्यों ने लोक कलाकारों के लिए अलग और दीर्घकालीन संरक्षण नीति की मांग दोहराई।

विपक्ष के प्रमुख सवाल: लोक कलाकार, सुरक्षा और बजट प्राथमिकता

कांग्रेस विधायक नितेन्द्र सिंह राठौर ने चर्चा में कहा कि राज्य में लोक संस्कृति और लोक कलाकारों को बढ़ावा देने के लिए पर्याप्त काम नहीं हो रहा। उनका तर्क था कि सांस्कृतिक पहचान के मूल तत्वों को संरक्षण देने के लिए जमीनी स्तर पर अधिक निवेश की आवश्यकता है। विपक्षी सदस्यों ने यह भी कहा कि केवल आयोजनों से स्थिति नहीं सुधरेगी, बल्कि कलाकारों के लिए स्थायी सहायता तंत्र और प्रशिक्षण ढांचा जरूरी है।

विदेशी पर्यटकों की सुरक्षा पर भी विपक्ष ने सरकार से स्पष्ट रोडमैप मांगा। उनका कहना था कि पर्यटन आंकड़े बढ़ना सकारात्मक है, लेकिन पर्यटक सुरक्षा और आधारभूत सेवाओं में एकरूपता जरूरी है। पुजारियों के मानदेय में वृद्धि और प्राचीन मंदिरों की मरम्मत के लिए स्थायी बजट प्रावधान की मांग भी चर्चा के दौरान कई सदस्यों ने रखी।

प्रश्नकाल में पशुपालन पर बड़ा अपडेट: चिप आधारित ट्रैकिंग की तैयारी

सत्र के प्रश्नकाल में पशुपालन विभाग से जुड़े मुद्दों पर भी महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई। पशुपालन राज्यमंत्री लखन पटेल ने कहा कि मध्य प्रदेश में पहली बार गाय समेत सभी प्रकार के मवेशियों की ट्रैकिंग की जाएगी। इसके लिए विशेष चिप तैयार की जा रही है और अंतिम चरण का ट्रायल शेष है। सरकार का दावा है कि इस प्रणाली से मवेशियों का सटीक डेटा उपलब्ध होगा और निगरानी व्यवस्था मजबूत होगी।

राज्यमंत्री ने यह भी बताया कि आवारा गाय और अन्य मवेशियों की पहचान के लिए विशेष टैगिंग व्यवस्था लागू की जाएगी। यह जानकारी सत्तापक्ष के सदस्य अनिरुद्ध मारू के प्रश्न के जवाब में दी गई। मारू ने सरकार से गोशालाओं की संख्या, उन्हें दिए जाने वाले अनुदान, दी गई जमीन, गायों की संख्या को प्रमाणित करने की प्रक्रिया और ट्रैकिंग तंत्र के बारे में जानकारी मांगी थी।

सत्र की बहस से साफ है कि नर्मदा संरक्षण, सांस्कृतिक नीति, मंदिर प्रबंधन, पर्यटन सुरक्षा और पशुधन डेटा प्रबंधन जैसे मुद्दे राज्य की नीतिगत प्राथमिकताओं में एक साथ उभर रहे हैं। अब इन घोषणाओं के क्रियान्वयन की रफ्तार और जमीन पर असर पर नजर रहेगी।