2 मार्च को आदिवासी जिले में सजेगी मोहन कैबिनेट, कई अहम प्रस्तावों पर लग सकती है मुहर

मध्य प्रदेश सरकार की कैबिनेट बैठक अब राजधानी भोपाल से बाहर आदिवासी बहुल बड़वानी जिले में होने जा रही है। प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में 2 मार्च को मंत्रिपरिषद की बैठक आयोजित की जाएगी। इस बैठक को प्रशासनिक और राजनीतिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इसमें स्थानीय जरूरतों से जुड़े प्रस्तावों पर फोकस रहने की संभावना है।

राज्य स्तर की कैबिनेट बैठक किसी आदिवासी जिले में आयोजित करने का फैसला संकेत देता है कि सरकार क्षेत्रीय असंतुलन, बुनियादी सुविधाओं और योजनाओं के जमीनी असर की समीक्षा को प्राथमिकता देना चाहती है। बड़वानी जैसे जिले में बैठक होने से स्थानीय प्रशासनिक मुद्दे सीधे राज्य मंत्रिपरिषद के एजेंडे में आएंगे। इससे संबंधित विभागों को तैयारी तेज करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

2 मार्च की बैठक क्यों अहम मानी जा रही

कैबिनेट बैठक में राज्य स्तर के नियमित प्रशासनिक प्रस्तावों के साथ-साथ क्षेत्रीय जरूरतों से जुड़े बिंदुओं के शामिल होने की संभावना है। आदिवासी क्षेत्रों में सड़क, पेयजल, स्वास्थ्य सेवाएं, शिक्षा और आजीविका जैसे मुद्दे लंबे समय से प्रमुख एजेंडा रहे हैं। इसलिए माना जा रहा है कि बैठक में इन विषयों पर व्यावहारिक निर्णयों की दिशा में चर्चा हो सकती है। हालांकि अंतिम एजेंडा बैठक से पहले औपचारिक रूप से तय किया जाएगा।

सूत्रों के अनुसार, संबंधित विभागों से प्रस्तावों का संकलन और प्राथमिकता तय करने की प्रक्रिया पहले से चल रही है। बैठक में शामिल होने वाले मंत्रियों और वरिष्ठ अफसरों के लिए स्थानीय स्तर पर समन्वय व्यवस्था भी बनाई जा रही है। जिला प्रशासन का फोकस सुरक्षा, आवागमन, बैठक स्थल और प्रोटोकॉल प्रबंधन पर है, ताकि कार्यक्रम तय समय पर संपन्न हो सके।

आदिवासी अंचल पर नीतिगत फोकस का संकेत

बड़वानी में कैबिनेट बैठक का संदेश सिर्फ एक प्रशासनिक आयोजन तक सीमित नहीं है। इसे आदिवासी बहुल इलाकों में विकास योजनाओं की गति और गुणवत्ता पर प्रत्यक्ष निगरानी की पहल के तौर पर भी देखा जा रहा है। जब राज्य मंत्रिपरिषद किसी जिले में बैठती है, तो स्थानीय मुद्दे कागजी समीक्षा से निकलकर निर्णय स्तर पर पहुंचते हैं। इस वजह से बड़वानी बैठक के बाद क्षेत्रीय परियोजनाओं की रफ्तार पर असर पड़ सकता है।

सरकारी बैठकों के इस प्रारूप में आमतौर पर जिलों की लंबित परियोजनाएं, वित्तीय स्वीकृतियां, विभागीय समन्वय और योजनाओं की क्रियान्वयन स्थिति पर विशेष प्रस्तुति दी जाती है। बड़वानी बैठक में भी ऐसी ही समीक्षा अपेक्षित है। इससे यह स्पष्ट होगा कि राज्य सरकार आगामी महीनों में आदिवासी जिलों के लिए किस तरह की प्राथमिकताएं तय करती है।

स्थानीय प्रशासन और विभागों की तैयारी

बैठक को लेकर जिला प्रशासन ने लॉजिस्टिक्स और समन्वय संबंधी तैयारियां शुरू कर दी हैं। संबंधित विभागों से जानकारी, प्रगति रिपोर्ट और प्रस्तावित फैसलों का प्रारूप मांगा जा रहा है। कई मामलों में स्थानीय स्तर से राज्य स्तर तक अनुमोदन की प्रक्रिया तेज की गई है, ताकि कैबिनेट के सामने प्रस्तुत होने वाले बिंदु स्पष्ट और क्रियान्वयन योग्य हों।

अधिकारियों का मानना है कि ऐसी बैठकों से फील्ड प्रशासन को सीधा नीति समर्थन मिलता है। जिले में जिन योजनाओं पर निर्णय लंबित रहते हैं, वे तेजी से आगे बढ़ सकती हैं। खासतौर पर वे प्रस्ताव जिनका असर बड़े भौगोलिक क्षेत्र या बड़ी आबादी पर पड़ता है, उन्हें प्राथमिकता मिलने की संभावना रहती है।

फिलहाल 2 मार्च की बैठक को लेकर सरकारी स्तर पर कार्यक्रम को अंतिम रूप दिया जा रहा है। अंतिम एजेंडा और स्वीकृत प्रस्ताव बैठक के बाद ही स्पष्ट होंगे। फिर भी यह तय है कि बड़वानी में होने वाली यह कैबिनेट बैठक आदिवासी क्षेत्रों के विकास विमर्श को राज्य स्तर पर केंद्र में लाएगी।