MP Cabinet का मानवीय फैसला, अब अविवाहित, विधवा और तलाकशुदा बेटियों को भी मिलेगी पारिवारिक पेंशन का अधिकार

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की पहल को सरकार एक मानवीय निर्णय के रूप में देख रही है। यह केवल नियमों में बदलाव भर नहीं, बल्कि उन बेटियों के जीवन से जुड़ा कदम है, जो माता-पिता के निधन के बाद आर्थिक असुरक्षा और कानूनी जटिलताओं के बीच फंस जाती थीं। अब तक कई मामलों में देखा गया कि पिता के निधन के बाद, विशेष परिस्थितियों में रहने वाली बेटियां पारिवारिक पेंशन से वंचित रह जाती थीं, जबकि उन्हें सबसे अधिक सहारे की आवश्यकता होती है।

कैबिनेट बैठक में लिए गए ताजा निर्णय के अनुसार, अब अविवाहित, विधवा और तलाकशुदा पुत्रियों को भी पारिवारिक पेंशन का अधिकार मिलेगा। यह बदलाव उन बेटियों के लिए बड़ी राहत है, जिनके जीवन में न तो माता-पिता का साथ बचा है और न ही वैवाहिक जीवन का संबल। ऐसी स्थिति में आर्थिक सुरक्षा का यह प्रावधान उनके लिए सम्मानजनक जीवन जीने का आधार बनेगा।

सरकार का मानना है कि पारिवारिक पेंशन का उद्देश्य केवल आर्थिक सहायता देना नहीं, बल्कि आश्रितों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करना भी है। लंबे समय से विभिन्न मंचों पर यह मांग उठती रही कि विशेष परिस्थितियों में रहने वाली बेटियों को भी इस दायरे में शामिल किया जाए। अब इस निर्णय के बाद वे भी पेंशन की पात्रता में शामिल होंगी, जिससे उनकी आर्थिक निर्भरता कम होगी।

यह फैसला संवेदनशील शासन दृष्टिकोण का उदाहरण माना जा रहा है, जहां नियमों से ऊपर उठकर मानवीय पहल को प्राथमिकता दी गई है। इससे न केवल जरूरतमंद बेटियों को सहारा मिलेगा, बल्कि समाज में यह संदेश भी जाएगा कि सरकार कमजोर वर्गों के हित में व्यावहारिक और संवेदनशील निर्णय लेने के लिए प्रतिबद्ध है।