मध्य प्रदेश में उच्च शिक्षा हासिल कर रहे छात्रों के लिए राहत भरी खबर है। प्रदेश के कॉलेजों में अब भाषा की दीवार आड़े नहीं आएगी। उच्च शिक्षा विभाग ने निर्णय लिया है कि कॉलेजों में अब दो भाषाओं में पढ़ाई कराई जाएगी। इसके लिए जबलपुर में नए सिरे से सिलेबस तैयार किया गया है। इस बदलाव का सीधा फायदा उन छात्रों को मिलेगा जो भाषाई दिक्कतों के कारण अपनी पढ़ाई बीच में छोड़ देते थे या कम अंक लाते थे।
जबलपुर में केंद्रीय अध्ययन मंडल (Central Board of Studies) की बैठक आयोजित की गई थी। इस बैठक में प्रदेश भर के विषय विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया। मंथन के बाद यह तय किया गया कि आगामी शैक्षणिक सत्र से सिलेबस को इस तरह डिजाइन किया जाए कि वह द्विभाषी (Bilingual) हो। यानी अब कठिन विषयों को हिंदी और अंग्रेजी दोनों में समझाया जाएगा।
ग्रामीण छात्रों को मिलेगा सीधा लाभ
दरअसल, नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) लागू होने के बाद से ही स्थानीय भाषाओं को बढ़ावा देने पर जोर दिया जा रहा है। देखा गया है कि ग्रामीण परिवेश से आने वाले छात्र अक्सर साइंस, कॉमर्स और मैनेजमेंट जैसे विषयों में अंग्रेजी शब्दावली के कारण पिछड़ जाते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि जब सिलेबस और किताबें दोनों भाषाओं में उपलब्ध होंगी, तो छात्रों की समझ बेहतर होगी। अब तक कई बार ऐसा होता था कि छात्र विषय को समझते तो थे, लेकिन अंग्रेजी में उत्तर न लिख पाने के कारण उनके नंबर कट जाते थे। नई व्यवस्था में इस समस्या का समाधान हो जाएगा।
जबलपुर में तैयार हुआ खाका
सिलेबस निर्धारण की यह पूरी प्रक्रिया जबलपुर में पूरी की गई है। यहाँ अलग-अलग विषयों के लिए कमेटियां गठित की गई थीं। इन कमेटियों ने स्नातक (UG) और स्नातकोत्तर (PG) स्तर के पाठ्यक्रमों की समीक्षा की।
मुख्य बदलाव:
1. तकनीकी शब्दों को अंग्रेजी के साथ हिंदी में भी लिखा जाएगा।
2. प्रश्न पत्रों का पैटर्न भी इसी आधार पर सेट होगा।
3. रेफरेंस बुक्स की सूची में हिंदी लेखकों और अनुवादित किताबों को प्राथमिकता दी गई है।
नई शिक्षा नीति के तहत कदम
उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार, यह बदलाव नई शिक्षा नीति के अनुरूप है। इसका उद्देश्य छात्रों को रटने की बजाय विषय को समझने पर जोर देना है। जब पढ़ाई उनकी अपनी या सहज भाषा में होगी, तो वे कॉन्सेप्ट को बेहतर पकड़ पाएंगे। यह नया सिलेबस जल्द ही सभी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों को भेज दिया जाएगा, ताकि अगले सत्र से इसे सुचारू रूप से लागू किया जा सके।