MP राज्यसभा सीट पर घमासान: कौन लेगा दिग्विजय सिंह का स्थान? जीतू पटवारी या सज्जन वर्मा

Bhopal News: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के तीसरी बार राज्यसभा नहीं जाने के ऐलान के बाद मध्य प्रदेश की सियासत में हलचल तेज हो गई है। अप्रैल में खाली हो रही उनकी सीट के लिए कांग्रेस में दावेदारों की लंबी कतार लग गई है।
इस सियासी दौड़ में सबसे ज्यादा चर्चा इंदौर के दो कद्दावर नेताओं, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी और पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा, को लेकर है। यदि इनमें से किसी एक को मौका मिलता है तो 26 साल का लंबा इंतजार खत्म होगा, जब कांग्रेस की तरफ से इंदौर के किसी नेता को राज्यसभा भेजा जाएगा।
मध्य प्रदेश की औद्योगिक राजधानी और राजनीति का एक अहम केंद्र होने के बावजूद इंदौर को कांग्रेस आलाकमान से राज्यसभा में प्रतिनिधित्व मिले एक लंबा अरसा बीत चुका है। आखिरी बार 1982 में पार्टी ने यहां से राधाकिशन मालवीय को राज्यसभा भेजा था, जो साल 2000 तक सांसद रहे।
उनके बाद से किसी भी इंदौरी नेता को यह अवसर नहीं मिला। हालाकि, भाजपा ने इंदौर से कविता पाटीदार को राज्यसभा सदस्य बनाया है, जिससे कांग्रेस पर अपने मजबूत गढ़ को प्रतिनिधित्व देने का दबाव भी है।
कई दिग्गज कतार में, पर इंदौर का दावा मजबूत
दिग्विजय सिंह के सीट छोड़ने की घोषणा करते ही कांग्रेस के कई बड़े नेता सक्रिय हो गए हैं। अंतिम फैसला पार्टी आलाकमान को दिल्ली में करना है, लेकिन भोपाल से लेकर दिल्ली तक लॉबिंग का दौर शुरू हो गया है।
दावेदारों की सूची में पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ या उनके बेटे नकुल नाथ, पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण यादव, पूर्व सांसद मीनाक्षी नटराजन और पूर्व मंत्री कमलेश्वर पटेल जैसे नाम भी शामिल हैं। हालांकि, मौजूदा सियासी समीकरणों को देखते हुए जीतू पटवारी और सज्जन सिंह वर्मा का पलड़ा भारी माना जा रहा है।
जीतू पटवारी: राहुल गांधी की पसंद और युवा चेहरा
हाल ही में मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष की कमान संभालने वाले जीतू पटवारी को राहुल गांधी का करीबी माना जाता है। 2013 में राऊ विधानसभा से विधायक के रूप में अपना राजनीतिक सफर शुरू करने वाले पटवारी 2018 में कमलनाथ सरकार में उच्च शिक्षा मंत्री बने। उन्हें एक जुझारू और मुखर नेता के तौर पर जाना जाता है। प्रदेश अध्यक्ष होने के नाते उनका दावा स्वाभाविक रूप से मजबूत है और पार्टी उन्हें राज्यसभा भेजकर संगठन और संसदीय राजनीति में संतुलन साधने का प्रयास कर सकती है।
सज्जन सिंह वर्मा: अनुभव और मजबूत पकड़
वहीं, सज्जन सिंह वर्मा कांग्रेस के सबसे अनुभवी नेताओं में से एक हैं। अपने विरोधियों पर तीखे राजनीतिक प्रहार के लिए जाने जाने वाले वर्मा की पार्टी में भोपाल से दिल्ली तक मजबूत पकड़ है। वे पांच बार सोनकच्छ से विधायक, एक बार देवास से सांसद और कमलनाथ सरकार में लोक निर्माण मंत्री रह चुके हैं। उनका लंबा संसदीय और प्रशासनिक अनुभव उन्हें राज्यसभा के लिए एक योग्य उम्मीदवार बनाता है। माना जा रहा है कि पार्टी उनके अनुभव का लाभ राष्ट्रीय स्तर पर उठाना चाहेगी।
अब देखना यह है कि कांग्रेस आलाकमान मध्य प्रदेश से किसे उच्च सदन भेजने का फैसला करता है। यह निर्णय न केवल पार्टी की आंतरिक राजनीति को प्रभावित करेगा, बल्कि यह भी तय करेगा कि क्या 26 साल के लंबे अंतराल के बाद इंदौर को कांग्रेस की ओर से राज्यसभा में एक बार फिर अपनी आवाज मिलेगी।