भोपाल: मध्य प्रदेश में डॉ. मोहन यादव सरकार के गठन के कई महीनों बाद अब निगम-मंडलों में राजनीतिक नियुक्तियों की प्रक्रिया तेज हो गई है। सूत्रों के मुताबिक, राज्य सरकार ने अध्यक्ष और उपाध्यक्षों के पदों के लिए संभावित नामों की सूची तैयार कर ली है और इसे अंतिम मंजूरी के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के केंद्रीय नेतृत्व के पास दिल्ली भेज दिया गया है। माना जा रहा है कि दिल्ली से हरी झंडी मिलते ही सूची जारी कर दी जाएगी।
लंबे समय से इन नियुक्तियों का इंतजार कर रहे भाजपा के वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं के लिए यह एक बड़ी खबर है। लोकसभा चुनाव के कारण यह प्रक्रिया रुकी हुई थी, लेकिन अब चुनाव संपन्न होने और शानदार जीत के बाद सरकार संगठन को मजबूत करने और नेताओं को समायोजित करने पर ध्यान केंद्रित कर रही है।
250 से ज्यादा दावेदार, 100 पद
जानकारी के अनुसार, प्रदेश में करीब 100 निगम-मंडलों और अन्य प्राधिकरणों में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सदस्यों के पद खाली हैं। इन पदों के लिए 250 से ज्यादा नेता दावेदारी कर रहे हैं, जिससे पार्टी के लिए अंतिम नामों का चयन करना एक बड़ी चुनौती है। इन दावेदारों में कई पूर्व मंत्री, पूर्व विधायक और पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारी शामिल हैं जो विधानसभा चुनाव में टिकट से वंचित रह गए थे या चुनाव हार गए थे।
पार्टी सूत्रों का कहना है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, प्रदेश अध्यक्ष वी.डी. शर्मा और संगठन के प्रमुख पदाधिकारियों ने कई दौर की बैठकों के बाद यह सूची तैयार की है। सूची को अंतिम रूप देने से पहले क्षेत्रीय और जातीय समीकरणों का भी विशेष ध्यान रखा गया है।
क्यों अहम हैं ये नियुक्तियां?
मध्य प्रदेश में सत्ता और संगठन के बीच संतुलन साधने के लिए निगम-मंडलों में नियुक्तियां हमेशा से महत्वपूर्ण रही हैं। ये नियुक्तियां सरकार को उन वरिष्ठ नेताओं को सम्मानजनक पद देने का अवसर प्रदान करती हैं, जिन्हें मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिल पाती है।
इसके अलावा, आगामी नगरीय निकाय और पंचायत चुनावों को देखते हुए भी इन नियुक्तियों को अहम माना जा रहा है। पार्टी का मानना है कि इन पदों पर नेताओं की नियुक्ति से जमीनी स्तर पर संगठन को मजबूती मिलेगी और कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ेगा। लोकसभा चुनाव में बेहतर प्रदर्शन करने वाले क्षेत्रों के नेताओं को भी इसमें प्राथमिकता दी जा सकती है।
क्षेत्रीय और जातीय संतुलन पर जोर
मोहन यादव मंत्रिमंडल में कई क्षेत्रों और जातियों को पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं मिलने की बातें उठी थीं। अब निगम-मंडल की नियुक्तियों के जरिए इस कमी को पूरा करने की कोशिश की जाएगी। पार्टी का प्रयास है कि मालवा, विंध्य, महाकौशल और ग्वालियर-चंबल जैसे सभी प्रमुख क्षेत्रों के नेताओं को समायोजित किया जाए। इसके साथ ही विभिन्न जातियों के नेताओं को भी प्रतिनिधित्व देकर सामाजिक समीकरण को संतुलित किया जाएगा।
यह भी कहा जा रहा है कि राज्यसभा उपचुनाव के बाद इन नियुक्तियों की घोषणा की जा सकती है। केंद्रीय नेतृत्व की मंजूरी के बाद किसी भी दिन सूची जारी हो सकती है, जिससे प्रदेश की राजनीति में एक नई हलचल देखने को मिलेगी।