अवैध उत्खनन पर मुख्य सचिव अनुराग जैन का ‘जीरो टॉलरेंस’, कलेक्टर-एसपी को कार्रवाई की खुली चेतावनी

मध्य प्रदेश में मोहन यादव सरकार ने खनन माफियाओं के खिलाफ अपनी रणनीति को और आक्रामक कर दिया है। प्रदेश के प्रशासनिक मुखिया यानी मुख्य सचिव (CS) अनुराग जैन ने अवैध उत्खनन और परिवहन को लेकर जिला अधिकारियों के पेंच कसे हैं। मुख्य सचिव ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक में स्पष्ट शब्दों में कहा कि अवैध खनन किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

इस बैठक में मुख्य सचिव ने राज्य की कानून व्यवस्था और विकास कार्यों की समीक्षा की, लेकिन उनका मुख्य केंद्र बिंदु अवैध उत्खनन रहा। उन्होंने सभी जिलों के कलेक्टर और पुलिस अधीक्षकों (SP) को सीधे तौर पर चेतावनी दी है। जैन ने कहा कि महज औपचारिकता निभाने या छोटे कर्मचारियों पर कार्रवाई करने से काम नहीं चलेगा। यदि किसी जिले में अवैध उत्खनन या परिवहन की शिकायत मिलती है, तो उसके लिए सीधे जिले के वरिष्ठ अधिकारी जवाबदेह होंगे।

कागजी कार्रवाई नहीं, मैदानी असर चाहिए

मुख्य सचिव अनुराग जैन ने अधिकारियों को दो टूक कहा कि अवैध गतिविधियों पर रोक केवल कागजों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। अक्सर देखा जाता है कि कार्रवाई के नाम पर इक्का-दुक्का वाहनों को जब्त कर खानापूर्ति कर ली जाती है, जबकि मुख्य माफिया बच निकलते हैं। सीएस ने निर्देश दिए कि प्रशासन को माफियाओं की कमर तोड़नी होगी और इसके लिए ‘रूट कॉज’ पर प्रहार करना होगा।

“अवैध उत्खनन रोकने की जिम्मेदारी सीधे तौर पर कलेक्टर और एसपी की है। यदि आपके जिले से ऐसी खबरें आती हैं, तो यह माना जाएगा कि प्रशासन की पकड़ ढीली है और इसके परिणाम भुगतने होंगे।” — अनुराग जैन, मुख्य सचिव

खनन माफिया पर नकेल कसने की रणनीति

बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे अपने-अपने जिलों में खुफिया तंत्र को मजबूत करें। अवैध रेत खनन, पत्थर उत्खनन और मुरम के अवैध परिवहन पर विशेष निगरानी रखी जाए। उन्होंने कहा कि पुलिस और राजस्व विभाग को संयुक्त रूप से कार्रवाई करनी चाहिए ताकि माफियाओं में कानून का डर पैदा हो सके। सरकार की मंशा साफ है कि प्राकृतिक संसाधनों की लूट को हर हाल में रोका जाए।

पुरानी घटनाओं से सबक

गौरतलब है कि मध्य प्रदेश में अवैध उत्खनन एक बड़ी चुनौती रहा है। पूर्व में मुरैना, शहडोल और नर्मदा पुरम जैसे क्षेत्रों में खनन माफियाओं द्वारा अधिकारियों पर हमले की घटनाएं भी सामने आ चुकी हैं। शहडोल में तो अवैध उत्खनन रोकने गए एक पटवारी की ट्रैक्टर से कुचलकर हत्या तक कर दी गई थी। इन घटनाओं ने राज्य की कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए थे। मुख्य सचिव के ताजा निर्देश इसी पृष्ठभूमि में देखे जा रहे हैं, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो और माफिया राज को खत्म किया जा सके।

निष्कर्ष

मुख्य सचिव अनुराग जैन की इस सख्ती से प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप है। यह स्पष्ट संकेत है कि राज्य सरकार अब ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति पर काम कर रही है। अब देखना होगा कि मैदानी स्तर पर कलेक्टर और एसपी इस अल्टीमेटम के बाद कितनी तत्परता से कार्रवाई करते हैं और क्या वे अवैध खनन के नेटवर्क को ध्वस्त करने में सफल हो पाते हैं।