जबलपुर में 550 करोड़ का प्रोजेक्ट शुरू, बिजली उत्पादन की लागत आधी होगी, प्रदेश को मिलेगी सस्ती बिजली

मध्य प्रदेश में बिजली उपभोक्ताओं को जल्द ही बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। प्रदेश में बिजली उत्पादन की लागत को कम करने के लिए जबलपुर में एक महत्वाकांक्षी परियोजना पर काम शुरू हो गया है। करीब 550 करोड़ रुपये की लागत वाले इस प्रोजेक्ट से न केवल बिजली उत्पादन सस्ता होगा, बल्कि इसकी गुणवत्ता में भी सुधार आएगा।

यह प्रोजेक्ट जबलपुर स्थित बरगी पनबिजली संयंत्र (Bargi Hydel Power Plant) के आधुनिकीकरण से जुड़ा है। इस संयंत्र की पुरानी हो चुकी मशीनों को बदला जा रहा है। नई तकनीक के इस्तेमाल से उत्पादन क्षमता बढ़ेगी और रखरखाव का खर्च कम होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे बिजली उत्पादन की लागत लगभग आधी हो सकती है।

550 करोड़ का निवेश और आधुनिकीकरण

मध्य प्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी (MPPGCL) ने इस प्रोजेक्ट के लिए जापान की एक प्रमुख कंपनी के साथ समझौता किया है। इस समझौते के तहत बरगी हिल्स स्थित रानी अवंती बाई लोधी सागर परियोजना की इकाइयों का रिनोवेशन किया जाएगा। 550 करोड़ रुपये के इस निवेश से 34 साल पुरानी मशीनों को बदलकर अत्याधुनिक उपकरण लगाए जाएंगे।

अधिकारियों के अनुसार, यह कार्य जापान इंटरनेशनल को-ऑपरेशन एजेंसी (JICA) के सहयोग से किया जा रहा है। इस आधुनिकीकरण का मुख्य उद्देश्य पुरानी टर्बाइनों की दक्षता बढ़ाना और बार-बार आने वाली तकनीकी खराबी को दूर करना है।

बिजली दरों पर क्या होगा असर?

वर्तमान में कोयले से बिजली उत्पादन महंगा पड़ता है, जबकि हाइडल पावर (पनबिजली) सबसे सस्ता विकल्प है। बरगी संयंत्र के अपग्रेड होने के बाद यहां से सस्ती बिजली का उत्पादन बढ़ेगा। जब उत्पादन लागत कम होगी, तो वितरण कंपनियों को सस्ती बिजली मिलेगी। इसका सीधा असर उपभोक्ताओं के बिजली बिल पर पड़ेगा। उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले समय में बिजली की दरों में कमी आ सकती है या कम से कम दरों में बढ़ोतरी पर लगाम लगेगी।

34 साल बाद हो रहा है बदलाव

रानी अवंती बाई लोधी सागर परियोजना की शुरुआत 1988 में हुई थी। तब से लेकर अब तक इन मशीनों ने अपनी पूरी क्षमता से काम किया है। लेकिन, तीन दशक से अधिक समय बीत जाने के कारण मशीनों की कार्यक्षमता प्रभावित हो रही थी। अब नई तकनीक के साथ इनकी क्षमता को 90 मेगावाट से बढ़ाकर और अधिक करने की योजना है।

इस प्रोजेक्ट के पूरा होने के बाद, मध्य प्रदेश में रिन्यूएबल एनर्जी के क्षेत्र में भी मजबूती आएगी। सस्ती और निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने की दिशा में यह कदम मील का पत्थर साबित हो सकता है।