MP में बड़ा आर्थिक संकट: रियल एस्टेट और शराब से आय घटी; आबकारी और पंजीयन विभाग लक्ष्य से 6000 करोड़ पीछे

Bhopal News: मध्य प्रदेश सरकार इस समय गंभीर राजस्व संकट (Revenue Crisis) के दौर से गुजर रही है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के समापन पर सरकार के दो सबसे कमाऊ विभाग—आबकारी और पंजीयन—अपने निर्धारित लक्ष्यों को पूरा करने में पीछे हो रहे है।
ताजा आंकड़ों के अनुसार, शराब और रियल एस्टेट सेक्टर से होने वाली आय में भारी गिरावट आई है, जिससे सरकारी खजाने पर करीब 6,000 करोड़ रुपये का घाटा मंडरा रहा है।
शराब नीति और ठेकों में सुस्ती ने बिगाड़ा गणित
आबकारी विभाग (Excise Department) को इस बार सबसे बड़ा झटका लगा है। सरकार ने इस साल करीब 19,952 करोड़ रुपये का राजस्व लक्ष्य रखा था, लेकिन 30 मार्च तक केवल 15,000 करोड़ रुपये के ही ठेके उठ पाए हैं। करीब 5,000 करोड़ रुपये की यह कमी सरकार की नई शराब नीति और बड़े जिलों में ठेकेदारों की बेरुखी के कारण मानी जा रही है।
  • छोटे जिलों का बेहतर प्रदर्शन: डिंडोरी, उमरिया, शहडोल और खरगोन जैसे जिलों में 100% ठेके उठे हैं।
  • बड़े जिलों में संकट: नीमच, शाजापुर, रतलाम और झाबुआ जैसे जिलों में स्थिति चिंताजनक है, जहाँ 50% से भी कम ठेके उठ पाए हैं।
रियल एस्टेट: इंदौर और भोपाल भी लक्ष्य से दूर
पंजीयन विभाग (Registration Department) की स्थिति भी बहुत अच्छी नहीं है। विभाग को 13,920 करोड़ रुपये का लक्ष्य दिया गया था, जिसके मुकाबले अब तक 12,852 करोड़ रुपये ही जमा हो सके हैं।
  • इंदौर का हाल: प्रदेश के आर्थिक केंद्र इंदौर में रियल एस्टेट से 3,097 करोड़ का लक्ष्य था, लेकिन 2,661 करोड़ ही आए हैं। दस्तावेजों की संख्या में कमी आई है और जो भी बढ़ोतरी दिख रही है, वह केवल सरकारी गाइडलाइन रेट बढ़ने की वजह से है।
  • जबलपुर और भोपाल: भोपाल में 1,431 करोड़ के लक्ष्य के मुकाबले केवल 700 करोड़ और जबलपुर में 1,104 करोड़ के बदले महज 570 करोड़ की आय हुई है।
क्यों बढ़ा राजस्व का दबाव?
विशेषज्ञों का मानना है कि एक तरफ सरकार पर पुराने कर्ज का बोझ बढ़ रहा है, वहीं दूसरी तरफ प्रमुख विभागों से होने वाली आय उम्मीद के मुताबिक नहीं हो रही है। आबकारी विभाग में हर साल 20% बढ़ोतरी का लक्ष्य रखा जाता है, जो इस बार धरातल पर उतरता नहीं दिख रहा है। 31 मार्च (आज) लक्ष्य पूरा करने का आखिरी दिन है, लेकिन एक ही दिन में 6,000 करोड़ रुपये की भरपाई करना लगभग नामुमकिन नजर आ रहा है।
आज रात 12 बजे तक की चुनौती
आज वित्तीय वर्ष का आखिरी दिन होने के कारण पंजीयन और आबकारी दफ्तरों में हलचल तेज है। सरकार की कोशिश है कि अंतिम घंटों में अधिक से अधिक राजस्व वसूला जाए ताकि घाटे के अंतर को कम किया जा सके। हालांकि, बड़े शहरों में रियल एस्टेट और शराब के ठेकों में आई सुस्ती ने वित्त विभाग की चिंताएं बढ़ा दी हैं।