नागलवाड़ी में 2 मार्च को बैठेगी पहली कृषि कैबिनेट, किसान कल्याण वर्ष में निमाड़ को बड़ी सौगात की तैयारी

मध्यप्रदेश में वर्ष 2026 को किसान कल्याण वर्ष के रूप में समर्पित करने की तैयारी के बीच सरकार 2 मार्च को बड़वानी जिले के नागलवाड़ी में प्रदेश की पहली कृषि कैबिनेट बैठक करने जा रही है। इस बैठक को किसानों से जुड़े निर्णयों के लिए अहम माना जा रहा है। सरकार की योजना है कि कृषि और किसान हित में जरूरी कदमों को तय समयसीमा और स्पष्ट कार्ययोजना के साथ लागू किया जाए।

सूत्रों के अनुसार, बैठक में कई प्रस्तावों पर अंतिम सहमति दी जा सकती है। इन प्रस्तावों का दायरा केवल फसल उत्पादन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पशुपालन से जुड़े मुद्दे भी इसमें शामिल होंगे। राज्य स्तर पर लिए जाने वाले फैसलों का लाभ पूरे मध्यप्रदेश के किसानों तक पहुंचाने पर जोर रहेगा।

नागलवाड़ी को चुनने के पीछे क्षेत्रीय रणनीति

बैठक का स्थान नागलवाड़ी तय किए जाने को भी महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है। सरकार का फोकस निमाड़ क्षेत्र के विकास पर है और इसी कारण इस बैठक को क्षेत्रीय संतुलन की दृष्टि से भी देखा जा रहा है। निमाड़ के प्रमुख जिले खरगोन, खंडवा, बड़वानी और बुरहानपुर इस प्रक्रिया के केंद्र में हैं। इसके साथ धार, झाबुआ और अलीराजपुर जैसे जिले भी इस निर्णय-श्रृंखला से सीधे प्रभावित होंगे।

प्रशासनिक स्तर पर माना जा रहा है कि कृषि कैबिनेट के जरिये क्षेत्र-विशेष की जरूरतों को अलग से पहचानकर नीति हस्तक्षेप किया जा सकेगा। विशेषकर उन इलाकों में, जहां खेती और पशुपालन स्थानीय अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार हैं, वहां लक्षित फैसले अधिक असरदार हो सकते हैं।

जनजातीय आस्था और सरकारी कार्यक्रम का संगम

नागलवाड़ी स्थित करीब 800 वर्ष पुराने भिलट देव मंदिर का जनजातीय समाज में विशेष धार्मिक महत्व है। इसी वजह से भी इस स्थान को प्रतीकात्मक और सामाजिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सरकारी कार्यक्रम और जनजातीय आस्था के बीच संतुलन बनाते हुए आयोजन की रूपरेखा तैयार की गई है।

कार्यक्रम के क्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जुलवानिया में आयोजित भगोरिया हाट की परंपरा में भी शामिल होंगे। इससे सरकार की ओर से जनजातीय समाज के सांस्कृतिक आयोजनों के साथ सहभागिता का संदेश जाएगा।

कृषि के साथ पशुपालन पर भी निर्णय संभव

बैठक में जिन बिंदुओं पर विचार की संभावना बताई जा रही है, उनमें किसानों की आय, कृषि ढांचे की मजबूती, स्थानीय जरूरतों के अनुरूप योजनाओं का क्रियान्वयन और पशुपालकों के लिए उपयोगी कदम शामिल हैं। सरकार का रुख यह है कि किसान और पशुपालक, दोनों को एकीकृत नीति समर्थन मिले ताकि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को स्थायी आधार मिल सके।

राज्य सरकार पहले भी किसान हित से जुड़े कई कार्यक्रमों पर काम करती रही है, लेकिन कृषि कैबिनेट के रूप में अलग मंच बनाकर निर्णय लेने की यह पहली औपचारिक पहल है। इससे विभागीय समन्वय तेज होने और नीतिगत फैसलों में गति आने की उम्मीद जताई जा रही है।

कुल मिलाकर 2 मार्च का यह कार्यक्रम केवल एक बैठक नहीं, बल्कि 2026 किसान कल्याण वर्ष की दिशा तय करने वाला शुरुआती चरण माना जा रहा है। सरकार के लिए चुनौती अब इन प्रस्तावित निर्णयों को जमीन पर उतारने की होगी, ताकि क्षेत्रीय और राज्य स्तर पर घोषित प्राथमिकताओं का सीधा लाभ किसानों और पशुपालकों तक पहुंच सके।