मध्यप्रदेश में बेटियों के लिए बड़ा तोहफा, अब मुफ्त में लगेगी HPV वैक्सीन, कैंसर से बचाने का मिशन शुरू

देशव्यापी पहल के साथ मध्य प्रदेश में भी शनिवार से ह्यूमन पैपिलोमा वायरस यानी एचपीवी टीकाकरण अभियान शुरू किया गया। यह अभियान सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम पर केंद्रित है। राज्य सरकार के अनुसार, 14 वर्ष पूर्ण कर चुकी और 15 वर्ष से कम आयु की पात्र बालिकाओं को टीके की एकमात्र डोज लगाई जाएगी। प्रदेश में ऐसे लाभार्थियों की संख्या लगभग 8 लाख आंकी गई है। बाज़ार में करीब चार हजार रुपये कीमत वाला यह टीका चिन्हित शासकीय संस्थानों में निशुल्क उपलब्ध कराया जा रहा है।

अभियान का शुभारंभ कार्यक्रम दिल्ली से वर्चुअल माध्यम से संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अभिभावकों से भागीदारी बढ़ाने की अपील की। कार्यक्रम में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी और जिला स्तर की टीमों को लक्ष्य-आधारित कवरेज सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। केंद्र से राज्य को 7 लाख 58 हजार 500 डोज प्राप्त हो चुकी हैं, जिन्हें जिलों के बीच चरणबद्ध तरीके से भेजा गया है ताकि अभियान की शुरुआत में आपूर्ति बाधित न हो।

“अभिभावक अपनी बेटियों का टीकाकरण जरूर कराएं।” — डॉ. मोहन यादव, मुख्यमंत्री

प्रदेश स्तर पर अभियान की शुरुआत भोपाल के डॉ. कैलाशनाथ काटजू अस्पताल से की गई, जहां उप मुख्यमंत्री (स्वास्थ्य) राजेंद्र शुक्ल ने कार्यक्रम को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर के बाद सर्वाइकल कैंसर दूसरा सबसे सामान्य कैंसर है। उनके मुताबिक, एक लाख महिलाओं में लगभग 156 मामलों का अनुमान दर्ज होता है। स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि किशोरावस्था में समय पर टीकाकरण से भविष्य में जोखिम कम किया जा सकता है।

पात्रता, समय और केंद्रों की व्यवस्था

स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि टीकाकरण पूरी तरह स्वैच्छिक रहेगा और अभिभावकों की सहमति अनिवार्य होगी। यह अभियान तीन महीने तक चलेगा। जिन बालिकाओं की आयु अभियान शुरू होने के बाद 90 दिनों के भीतर 15 वर्ष पूरी होगी, वे भी पात्र मानी जाएंगी। टीकाकरण प्रतिदिन सुबह 9 बजे से दोपहर 2 बजे तक किया जाएगा, ताकि स्कूल और सामुदायिक स्तर पर पहुंच आसान रहे।

राज्य के सभी जिलों में लगभग 471 सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों को टीकाकरण स्थल बनाया गया है। इनमें मेडिकल कॉलेज, जिला अस्पताल और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र शामिल हैं। जिला प्रशासन और स्वास्थ्य अमले को स्कूल शिक्षा, महिला एवं बाल विकास और स्थानीय निकायों के साथ समन्वय में सूचीबद्ध लाभार्थियों तक पहुंचने की जिम्मेदारी दी गई है। लक्ष्य यह है कि निर्धारित आयु वर्ग की अधिकतम बालिकाओं का टीकाकरण अभियान अवधि में पूरा हो।

पंजीयन और टीकाकरण के दिन जरूरी सावधानियां

अभियान के तहत सभी पात्र किशोरियों का पंजीयन यूविन पोर्टल पर किया जाएगा। लाभार्थी पहचान-पत्र और अभिभावक के मोबाइल नंबर की मदद से स्वयं भी पंजीयन कर सकती हैं। कई जिलों में ऑन-साइट सहायता डेस्क भी बनाई जा रही हैं, ताकि पंजीयन में तकनीकी दिक्कतें कम हों। स्वास्थ्य विभाग ने यह भी कहा है कि रिकॉर्डिंग और ट्रैकिंग डिजिटल होने से कवरेज मॉनिटरिंग आसान होगी।

टीकाकरण के बाद बालिका को 30 मिनट तक स्वास्थ्य केंद्र में अवलोकन में रखा जाएगा। चिकित्सकों ने सलाह दी है कि टीका लगवाने के लिए खाली पेट नहीं आना चाहिए। सामान्य हल्के दुष्प्रभाव, जैसे इंजेक्शन स्थल पर दर्द, सिरदर्द या थकान, कुछ मामलों में दिख सकते हैं और आम तौर पर जल्दी ठीक हो जाते हैं। किसी भी असामान्य लक्षण की स्थिति में नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र से तत्काल संपर्क करने को कहा गया है।

मिशन मधुहारी: टाइप-1 डायबिटीज के लिए जिला स्तर पर क्लीनिक

इसी कार्यक्रम के साथ राज्य में टाइप-1 मधुमेह से पीड़ित बच्चों और युवाओं के लिए मिशन मधुहारी भी शुरू किया गया। मुख्यमंत्री ने बताया कि सभी जिला अस्पतालों में साप्ताहिक विशेष क्लीनिक संचालित होंगे। इन क्लीनिकों में इंसुलिन की उपलब्धता, ब्लड ग्लूकोज जांच, विशेषज्ञ परामर्श और नियमित फॉलोअप एक ही स्थान पर मिलेगा। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, टाइप-1 डायबिटीज में शरीर में इंसुलिन नहीं बनता, इसलिए लंबी अवधि तक व्यवस्थित उपचार जरूरी होता है।

मिशन के तहत 16 जिलों के 759 किशोर-किशोरियों को टीडी किट वितरित की जा रही है। इस किट में ग्लूकोमीटर, टेस्ट स्ट्रिप्स और जरूरी उपकरण शामिल हैं। उद्देश्य यह है कि बच्चे समय पर शुगर जांच सकें और उपचार योजना का पालन कर सकें। विभाग का कहना है कि नियमित जांच और परामर्श से जटिलताओं का जोखिम घटाया जा सकता है और परिवारों पर अचानक चिकित्सा बोझ भी कम हो सकता है।

स्वास्थ्य विभाग ने अभिभावकों से अपील की है कि वे आयु-पात्र बेटियों का समय पर पंजीयन कराएं और तय केंद्रों पर टीकाकरण करवाएं। साथ ही, टाइप-1 मधुमेह से जूझ रहे बच्चों के लिए जिला अस्पतालों में शुरू हो रही साप्ताहिक सेवाओं का लाभ लें। राज्य सरकार के अनुसार, दोनों अभियानों का उद्देश्य किशोर स्वास्थ्य सुरक्षा को प्राथमिक स्तर पर मजबूत करना और गंभीर बीमारियों की रोकथाम व प्रबंधन को संस्थागत रूप देना है।