मध्य प्रदेश को आवारा पशुओं की समस्या से निजात दिलाने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सरकार ने एक बड़ा और महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। प्रदेश के 19 जिलों में बड़े गौ-आश्रय स्थलों के निर्माण के लिए 4500 एकड़ से अधिक सरकारी भूमि आवंटित कर दी गई है। इस कदम से शहरों और गांवों की सड़कों को पशुमुक्त बनाने की दिशा में बड़ी मदद मिलेगी।
प्रदेश में सड़कों पर घूमते आवारा मवेशी लंबे समय से एक गंभीर समस्या बने हुए हैं। इनके कारण न केवल आए दिन सड़क दुर्घटनाएं होती हैं, बल्कि किसानों की फसलों को भी भारी नुकसान पहुंचता है। सरकार इस समस्या का स्थायी समाधान खोजने के लिए प्रतिबद्ध है और यह भूमि आवंटन उसी दिशा में एक ठोस कदम है।
225 करोड़ की भूमि का हस्तांतरण
सरकार के इस फैसले के तहत, राजस्व विभाग की कुल 4500 एकड़ भूमि, जिसका अनुमानित बाजार मूल्य 225 करोड़ रुपये से अधिक है, पशुपालन एवं डेयरी विभाग को हस्तांतरित की गई है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि इन गौशालाओं में पशुओं के लिए चारे, पानी और स्वास्थ्य की उचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए ताकि गौवंश का सही ढंग से संरक्षण हो सके।
इन 19 जिलों को मिली जमीन
योजना के तहत जिन 19 जिलों को भूमि आवंटित की गई है, उनमें मुरैना, ग्वालियर, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, श्योपुर, उज्जैन, रतलाम, शाजापुर, मंदसौर, नीमच, आगर-मालवा, देवास, इंदौर, धार, झाबुआ, अलीराजपुर, खंडवा और खरगोन शामिल हैं। इन जिलों में बड़ी क्षमता वाले गौ-आश्रय स्थल विकसित किए जाएंगे, जहां हजारों की संख्या में आवारा पशुओं को रखा जा सकेगा।
आत्मनिर्भर मॉडल पर होगा संचालन
सरकार की योजना इन गौशालाओं को केवल आश्रय स्थल तक सीमित न रखकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की भी है। यहां गोबर-धन प्लांट, बायोगैस, जैविक खाद और गोमूत्र से जुड़े अन्य उत्पादों के निर्माण को बढ़ावा दिया जाएगा। इससे न केवल गौशालाओं के संचालन का खर्च निकल सकेगा, बल्कि वे आर्थिक रूप से स्वावलंबी भी बन सकेंगी।
इस व्यापक योजना से उम्मीद है कि मध्य प्रदेश में आवारा पशुओं की समस्या पर प्रभावी ढंग से अंकुश लगेगा। इससे न केवल गौवंश का संरक्षण होगा, बल्कि आम नागरिकों को भी सड़क हादसों और फसल बर्बादी जैसी परेशानियों से बड़ी राहत मिलेगी।