MP सरकार लाड़ली बहनों को देगी 1-1 लाख रुपए! ‘गाय पालन’ के लिए मिलेगी आर्थिक मदद 

Ladli Behna Yojana : मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार राज्य की सवा करोड़ लाड़ली बहनों के लिए एक और बड़ी सौगात लेकर आ रही है। सरकार अब महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए उन्हें पशुपालन से जोड़ने की योजना बना रही है।
इस नई पहल के तहत पात्र महिलाओं को गाय पालन (गौपालन) के लिए आर्थिक मदद दी जाएगी। पशुपालन विभाग ने इस योजना का खाका तैयार करना शुरू कर दिया है।
प्रस्तावित योजना के मुताबिक, लाड़ली बहनों को गाय खरीदने के लिए 1-1 लाख रुपये तक की राशि मुहैया कराई जाएगी। यह राशि बैंक लोन के रूप में मिलेगी, जिस पर सरकार अपनी गारंटी देगी। इसका उद्देश्य महिलाओं की आय बढ़ाना और प्रदेश में दुग्ध उत्पादन को नई गति देना है।
किसे कितनी मिलेगी सब्सिडी
पशुपालन विभाग द्वारा तैयार किए जा रहे ड्राफ्ट में अलग-अलग वर्गों के लिए सब्सिडी का प्रावधान रखा गया है। योजना के अंतर्गत अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग की महिलाओं को 33 प्रतिशत तक अनुदान (सब्सिडी) देने की तैयारी है। वहीं, सामान्य और ओबीसी वर्ग की लाड़ली बहनों को 25 प्रतिशत सब्सिडी दी जा सकती है।
गाय खरीदने के लिए दी जाने वाली राशि को महिलाएं आसान किस्तों में चुका सकेंगी। सरकार का मानना है कि इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और महिलाएं आत्मनिर्भर बन सकेंगी।
दुग्ध उत्पादन बढ़ाने का लक्ष्य
इस योजना का एक बड़ा उद्देश्य प्रदेश में दूध के उत्पादन को बढ़ाना भी है। आंकड़ों के मुताबिक, मध्य प्रदेश में अभी हर रोज लगभग 591 लाख लीटर दूध का उत्पादन होता है। राज्य सरकार ने इसमें 20 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी का लक्ष्य रखा है। लाड़ली बहनों को गौपालन से जोड़कर इस लक्ष्य को हासिल करने की रणनीति बनाई गई है।
बजट में हो सकता है ऐलान
पशुपालन विभाग इस योजना पर तेजी से काम कर रहा है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार, आगामी बजट सत्र में ‘लाड़ली बहना गौपालन योजना’ की आधिकारिक घोषणा की जा सकती है। अंतिम निर्णय राज्य सरकार के स्तर पर लिया जाएगा।

“गौपालन योजना तैयार की जा रही है। इसे मूर्त रूप देने के लिए राज्य सरकार ही अंतिम निर्णय लेगी।” — डॉ. पीएस पटेल, संचालक, पशुपालन विभाग

गौरतलब है कि मध्य प्रदेश में लाड़ली बहना योजना पहले से ही काफी लोकप्रिय है, जिसके तहत महिलाओं को मासिक आर्थिक सहायता दी जाती है। अब इसे स्वरोजगार से जोड़ने की यह पहल महिलाओं के लिए एक बड़ा अवसर साबित हो सकती है।