मध्य प्रदेश सरकार अपने 10 लाख से अधिक अधिकारियों, कर्मचारियों और पेंशनरों को बड़ी राहत देने की तैयारी में है। राज्य सरकार राजस्थान और हरियाणा की तर्ज पर एक व्यापक स्वास्थ्य बीमा योजना (Health Insurance Scheme) लाने जा रही है। सूत्रों के मुताबिक, आगामी राज्य बजट में इसकी आधिकारिक घोषणा की जा सकती है।
लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग ने इस योजना का खाका तैयार कर लिया है। कर्मचारी संगठनों से सुझाव लेने के बाद अब इसे वित्त विभाग की मंजूरी के साथ कैबिनेट के समक्ष प्रस्तुत करने की तैयारी है। यह योजना पूरी तरह से कैशलेस होगी और इसमें अंशदायी (Contributory) प्रावधान रखे गए हैं।
गंभीर बीमारियों पर 35 लाख तक का कवर
प्रस्तावित योजना के तहत गंभीर बीमारियों के उपचार के लिए अधिकतम 35 लाख रुपये तक की सुविधा दी जाएगी। यह सुविधा कैशलेस होगी, यानी कर्मचारियों को अस्पताल में अपनी जेब से भुगतान नहीं करना होगा। योजना के संचालन के लिए एक फोटोयुक्त कार्ड जारी किया जाएगा, जिसमें कर्मचारी, उनके पति-पत्नी और आश्रित बच्चों का विवरण होगा।
ओपीडी और दवाओं के लिए 20 हजार रुपये
योजना की एक बड़ी विशेषता ओपीडी (OPD) कवर है। बीमित कर्मचारी को ओपीडी, दवाओं और जरूरी उपकरणों के लिए प्रतिवर्ष 20 हजार रुपये की राशि मिलेगी। इलाज के दौरान लगने वाले उपकरण और इंप्लांट का खर्च सीजीएचएस (CGHS) पैकेज दरों के अनुसार निर्धारित किया जाएगा।
कौन होगा योजना का पात्र?
योजना का लाभ सेवारत कर्मचारियों के साथ-साथ पेंशनरों को भी मिलेगा। पात्रता के नियमों को स्पष्ट करते हुए विभाग ने बताया है कि कर्मचारी के पति-पत्नी, माता-पिता, दो आश्रित बच्चे, दत्तक बच्चे और तलाकशुदा पुत्री को इसमें शामिल किया जाएगा।
पात्र हितग्राहियों का पंजीयन एमपीएसइडीसी (MPSEDC) के माध्यम से किया जाएगा और सभी के यूनिक डिजिटल कार्ड बनेंगे। आश्रितों की जानकारी का अनुमोदन कार्यालय प्रमुख द्वारा किया जाएगा, जिसका सत्यापन हर साल कराना अनिवार्य होगा। वहीं, पेंशनरों का पंजीयन उनके पेंशनर कोड के आधार पर होगा, और उनके कार्ड में पे-बैंड व विभाग का उल्लेख रहेगा।
राज्य स्वास्थ्य एजेंसी के हाथ में कमान
विभागीय अधिकारियों के अनुसार, इस महत्वकांक्षी योजना का संचालन राज्य स्वास्थ्य एजेंसी द्वारा किया जाएगा। एजेंसी में कानूनी, बीमा और स्वास्थ्य क्षेत्र के विशेषज्ञ शामिल होंगे। क्लेम प्रोसेसिंग, हेल्थ पैकेज और अस्पतालों की संबद्धता (Empanelment) जैसे तकनीकी कार्यों के लिए एक विशेष टीम तैनात की जाएगी। इसके अलावा, नीतिगत निर्णयों और योजना की समीक्षा के लिए एक टास्क फोर्स का गठन भी किया जाएगा।
इमरजेंसी में असंबद्ध अस्पतालों में भी इलाज
सरकार ने आपातकालीन स्थितियों का भी विशेष ध्यान रखा है। इमरजेंसी में यदि कोई कर्मचारी ऐसे अस्पताल में इलाज कराता है जो योजना से संबद्ध नहीं है, तो भी उसे उपचार व्यय की प्रतिपूर्ति (Reimbursement) की जाएगी। सामान्य परिस्थितियों में राज्य के सभी आयुष्मान योजना से जुड़े अस्पताल, केंद्र सरकार की स्वास्थ्य योजना (CGHS) के अस्पताल और राज्य के बाहर के चिन्हित उच्च गुणवत्ता वाले अस्पताल इस नेटवर्क का हिस्सा होंगे।