जबलपुर हाईकोर्ट का अहम फैसला: किसानों की उपज MSP से कम कीमत पर नहीं बिकेगी, मंडी सचिव होंगे जिम्मेदार

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने किसानों के अधिकारों को सुरक्षित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक और सख्त फैसला सुनाया है। जबलपुर स्थित मुख्य पीठ ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि प्रदेश की किसी भी कृषि उपज मंडी में किसानों की फसल न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से कम कीमत पर नहीं खरीदी जा सकेगी। कोर्ट ने इस आदेश के पालन की सीधी जिम्मेदारी मंडी सचिव और संबंधित अधिकारियों पर डाली है।

यह फैसला किसानों के लिए एक बड़ी राहत माना जा रहा है, जो अक्सर अपनी मेहनत की कमाई को औने-पौने दामों पर बेचने को मजबूर होते थे। हाईकोर्ट ने मंडी अधिनियम के प्रावधानों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने को कहा है।

मंडी सचिव पर होगी सीधी कार्रवाई

जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ ने इस मामले की सुनवाई की। कोर्ट ने अपने आदेश में साफ कहा है कि अगर किसी मंडी में उपज की नीलामी MSP से नीचे होती पाई गई, तो इसे मंडी अधिनियम का उल्लंघन माना जाएगा। ऐसी स्थिति में मंडी सचिव और अन्य जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि मंडी प्रशासन का यह कर्तव्य है कि वह किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाए। केवल औपचारिकता पूरी करने से काम नहीं चलेगा, बल्कि जमीनी स्तर पर नियमों का पालन होना चाहिए।

क्या था पूरा मामला?

यह मामला नरसिंहपुर जिले की गाडरवारा कृषि उपज मंडी से जुड़ा है। यहां किसानों की उपज MSP से कम दामों पर नीलाम की जा रही थी। इस अनियमितता के खिलाफ भारतीय किसान संघ ने हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की थी। याचिका में आरोप लगाया गया था कि मंडी में व्यापारियों द्वारा सिंडिकेट बनाकर किसानों का शोषण किया जा रहा है और मंडी प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है।

याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित MSP किसानों का अधिकार है, लेकिन मंडियों में बोली की शुरुआत ही कई बार MSP से नीचे के स्तर से होती है।

हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने मंडी बोर्ड और राज्य सरकार के रवैये पर भी सवाल उठाए। अदालत ने कहा कि कानून में स्पष्ट प्रावधान होने के बावजूद उनका पालन क्यों नहीं हो रहा है? कोर्ट ने निर्देश दिया कि मंडी में बोली की शुरुआत ही MSP या उससे ऊपर के मूल्य से होनी चाहिए।

अदालत ने यह भी आदेश दिया कि मंडी प्रांगण में जगह-जगह MSP की दरों को प्रदर्शित किया जाए ताकि किसान जागरूक रहें। इसके अलावा, मंडी अधिकारियों को नियमित रूप से नीलामी प्रक्रिया की निगरानी करनी होगी।

किसानों के लिए बड़ी जीत

कानूनी जानकारों का मानना है कि हाईकोर्ट का यह फैसला न केवल गाडरवारा बल्कि पूरे मध्य प्रदेश की मंडियों के लिए एक नजीर बनेगा। अब तक कई बार व्यापारी यह तर्क देते थे कि फसल की गुणवत्ता खराब होने पर कम दाम दिए जाते हैं, लेकिन अब इस प्रक्रिया में पारदर्शिता लानी होगी।

भारतीय किसान संघ ने इस फैसले का स्वागत किया है। संघ का कहना है कि इससे किसानों को आर्थिक सुरक्षा मिलेगी और वे कर्ज के जाल में फंसने से बच सकेंगे। मंडी सचिवों की जवाबदेही तय होने से अब प्रशासनिक लापरवाही पर भी लगाम लगेगी।