मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर खंडपीठ ने तकनीकी शिक्षा विभाग के अंतर्गत होने वाली पॉलिटेक्निक लेक्चरर भर्ती प्रक्रिया को लेकर एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। अदालत ने भर्ती नियमों में गेट (GATE) स्कोर की अनिवार्यता और अन्य मापदंडों को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है। जस्टिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE) और मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) को नोटिस जारी किया है।
यह मामला प्रदेश के सरकारी पॉलिटेक्निक कॉलेजों में व्याख्याताओं की नियुक्ति से जुड़ा है। याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया है कि भर्ती के लिए तय किए गए वर्तमान नियम केंद्रीय संस्था एआईसीटीई के निर्देशों के अनुरूप नहीं हैं। विशेष रूप से गेट परीक्षा के स्कोर को आधार बनाने और शैक्षणिक योग्यता के निर्धारण में विसंगतियों का मुद्दा उठाया गया है।
याचिका में उठाए गए प्रमुख सवाल
याचिकाकर्ताओं की ओर से पैरवी करते हुए अधिवक्ताओं ने कोर्ट को बताया कि तकनीकी शिक्षा विभाग द्वारा जारी विज्ञापन में कई शर्तें ऐसी हैं जो एआईसीटीई के 2019 के राजपत्र और बाद के संशोधनों का उल्लंघन करती हैं। इसमें मुख्य रूप से गेट स्कोर के वेटेज और बिना गेट पास उम्मीदवारों की पात्रता को लेकर सवाल खड़े किए गए हैं। उम्मीदवारों का कहना है कि लेक्चरर पद के लिए एआईसीटीई द्वारा निर्धारित न्यूनतम योग्यता का पालन सख्ती से होना चाहिए, न कि राज्य स्तर पर मनमाने नियम थोपे जाने चाहिए।
एआईसीटीई और सरकार को नोटिस
मामले की प्रारंभिक सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने इसे विचारणीय माना है। कोर्ट ने निम्नलिखित पक्षकारों को नोटिस जारी कर चार सप्ताह के भीतर जवाब प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है:
1. प्रमुख सचिव, तकनीकी शिक्षा विभाग, मध्य प्रदेश शासन।
2. सचिव, मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC)।
3. चेयरमैन, अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE)।
भर्ती प्रक्रिया पर असमंजस
गौरतलब है कि मध्य प्रदेश में लंबे समय से पॉलिटेक्निक व्याख्याताओं की भर्ती प्रक्रिया अटकी हुई थी। अब जब प्रक्रिया शुरू हुई है, तो नियमों को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। उम्मीदवारों का आरोप है कि गेट एग्जाम की अनिवार्यता या उसके अत्यधिक वेटेज से कई योग्य उम्मीदवार दौड़ से बाहर हो सकते हैं, जबकि एआईसीटीई के नियमों में अनुभव और शैक्षणिक रिकॉर्ड को भी महत्व दिया जाता है।
कोर्ट ने फिलहाल भर्ती प्रक्रिया पर कोई रोक नहीं लगाई है, लेकिन यह स्पष्ट किया है कि नियुक्तियां इस याचिका के अंतिम निर्णय के अधीन रहेंगी। अगली सुनवाई में सरकार और एआईसीटीई के जवाब के बाद ही यह तय हो पाएगा कि मौजूदा भर्ती नियमों में बदलाव किया जाएगा या प्रक्रिया यथावत रहेगी।