इंदौर में दूषित पानी के मुद्दे पर हाईकोर्ट सख्त, प्रशासन को फटकार लगाते हुए हेल्थ इमरजेंसी जैसे हालात पर मांगा जवाब

मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में दूषित पानी की समस्या अब गंभीर रूप लेती जा रही है। शहर के कई इलाकों में गंदे पानी की आपूर्ति और उसके कारण फैल रही बीमारियों को लेकर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए प्रशासन को फटकार लगाई है और इसे ‘हेल्थ इमरजेंसी’ जैसी स्थिति करार दिया है।

इंदौर के कई रिहायशी इलाकों में लंबे समय से नल से गंदा और बदबूदार पानी आने की शिकायतें मिल रही थीं। दूषित पानी पीने की वजह से बड़ी संख्या में लोग बीमार पड़ रहे हैं, जिससे अस्पतालों में मरीजों की कतारें लग गई हैं। इसी मुद्दे को लेकर दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने यह सख्त टिप्पणी की है।

प्रशासन की लापरवाही पर कोर्ट नाराज

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने नगर निगम और जिला प्रशासन के रवैये पर नाराजगी जाहिर की। कोर्ट ने कहा कि स्वच्छ पेयजल नागरिकों का मौलिक अधिकार है और प्रशासन इसे मुहैया कराने में विफल साबित हो रहा है। जजों ने टिप्पणी की कि हालात देखकर ऐसा लगता है कि शहर में स्वास्थ्य आपातकाल (Health Emergency) जैसी स्थिति बन गई है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी इसे गंभीरता से नहीं ले रहे हैं।

अदालत ने अधिकारियों से पूछा कि आखिर शहर के विभिन्न हिस्सों में सीवेज का पानी पीने के पानी की लाइनों में कैसे मिल रहा है? कोर्ट ने नगर निगम से ड्रेनेज और वाटर सप्लाई लाइन के मेंटेनेंस का पूरा ब्योरा तलब किया है।

अस्पतालों में बढ़ती भीड़ बनी चिंता का विषय

याचिका में बताया गया कि दूषित पानी के सेवन से शहर में डायरिया, पीलिया और टायफाइड जैसे जलजनित रोगों का प्रकोप बढ़ गया है। विशेष रूप से बच्चों और बुजुर्गों पर इसका बुरा असर पड़ रहा है। अस्पतालों में इन बीमारियों से पीड़ित मरीजों की बढ़ती संख्या प्रशासन की दावों की पोल खोल रही है। कोर्ट ने स्वास्थ्य विभाग को भी निर्देश दिया है कि प्रभावित इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाएं सुनिश्चित की जाएं और बीमारी के प्रसार को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।

“स्वच्छ पानी नागरिकों का अधिकार है। प्रशासन की लापरवाही से जनता की जान जोखिम में नहीं डाली जा सकती।” — हाईकोर्ट की टिप्पणी

जिम्मेदारों को देना होगा जवाब

हाईकोर्ट ने इस मामले में इंदौर नगर निगम आयुक्त और अन्य संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। कोर्ट ने पूछा है कि दूषित पानी की समस्या को दूर करने के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं और भविष्य में ऐसी स्थिति न बने, इसके लिए क्या कार्ययोजना है। मामले की अगली सुनवाई में अधिकारियों को वस्तुस्थिति रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए गए हैं।

गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब इंदौर में पानी की गुणवत्ता पर सवाल उठे हैं। इससे पहले भी शहर के कई पॉश इलाकों और बस्तियों में गंदे पानी की शिकायतें सामने आ चुकी हैं, लेकिन स्थाई समाधान न होने के कारण जनता को बार-बार इस संकट का सामना करना पड़ता है।