मध्य प्रदेश में जेल सुरक्षा व्यवस्था पर उठते सवालों के बीच जेल मुख्यालय ने बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। हाल ही में सिवनी और उज्जैन की जेलों से कैदियों के फरार होने की घटनाओं ने विभागीय अधिकारियों की नींद उड़ा दी है। इन घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए भोपाल स्थित जेल मुख्यालय ने प्रदेश की सभी केंद्रीय, जिला और उपजेलों में तत्काल प्रभाव से ‘सुरक्षा ऑडिट’ (Security Audit) करने के आदेश जारी किए हैं।
जेल विभाग के महानिदेशक (DG) ने सभी जेल अधीक्षकों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे अपने अधीन आने वाली जेलों की सुरक्षा व्यवस्था की बारीकी से जांच करें। इस आदेश के तहत जेल की दीवारों, बैरकों, सीसीटीवी कैमरों और सुरक्षा प्रहरियों की तैनाती की समीक्षा की जाएगी। प्रशासन का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि भविष्य में इस तरह की सुरक्षा चूक दोबारा न हो।
सुरक्षा ऑडिट में इन बिंदुओं पर रहेगा फोकस
जारी निर्देशों के अनुसार, जेल अधीक्षकों को जेल की बाहरी दीवारों (Perimeter Walls) और वॉच टावरों की स्थिति की जांच करनी होगी। इसके अलावा, जेल के अंदर लगे सीसीटीवी कैमरों के वर्किंग स्टेटस और उनके कवरेज एरिया का भी निरीक्षण किया जाएगा। आदेश में यह भी कहा गया है कि जेल के अंदर आने-जाने वाले रास्तों और संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षा कर्मियों की मुस्तैदी को परखा जाए। रात्रि गश्त (Night Patrolling) को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए रोस्टर सिस्टम की समीक्षा करने को भी कहा गया है।
सिवनी और उज्जैन की घटनाओं ने बढ़ाई चिंता
गौरतलब है कि हाल ही में उज्जैन की केंद्रीय भैरवगढ़ जेल और सिवनी जेल से कैदियों के भागने की घटनाएं सामने आई थीं। इन घटनाओं में कैदियों ने सुरक्षा में सेंध लगाकर भागने में सफलता हासिल की थी, जिससे जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए थे। प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई थी कि सुरक्षाकर्मियों की लापरवाही और निगरानी में कमी के कारण ही कैदी भागने में सफल रहे।
लापरवाही पर होगी सख्त कार्रवाई
जेल मुख्यालय ने स्पष्ट कर दिया है कि सुरक्षा ऑडिट रिपोर्ट में यदि किसी जेल में गंभीर खामियां पाई जाती हैं, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। विभाग ने जेल प्रहरियों और मुख्य प्रहरियों को भी अलर्ट मोड पर रहने के निर्देश दिए हैं। पुरानी घटनाओं से सबक लेते हुए, अब कैदियों की गिनती और उनकी गतिविधियों पर नजर रखने के लिए आधुनिक तकनीकों का भी सहारा लिया जाएगा। यह ऑडिट रिपोर्ट जल्द ही मुख्यालय को सौंपी जानी है, जिसके आधार पर आगे की रणनीति तय की जाएगी।