MP News: मध्य प्रदेश सरकार ने विधायकों को 15-15 करोड़ रुपए तक के विकास कार्यों के प्रस्ताव मांगे है। इस पर कांग्रेस ने प्रदेश सरकार पर भेदभाव का आरोप लगाया है। मध्य प्रदेश में विधायकों की विकास निधि में भेदभाव और कमीशन पर तत्काल संज्ञान लेने हेतु।
मुख्यमंत्री जी, मुझे यह पत्र लिखते हुए अत्यंत खेद और चिंता हो रही है कि आपकी सरकार द्वारा प्रदेश में विकास निधि के आवंटन को लेकर गंभीर भेदभाव किया जा रहा है। भारतीय जनता पार्टी के विधायकों को उनके विधानसभा क्षेत्रों के विकास के लिए 15 करोड़ रुपये की निधि प्रदान की जा रही है, जबकि कांग्रेस पार्टी के निर्वाचित जनप्रतिनिधियों को इस निधि से वंचित रखा गया है। यह न केवल जनप्रतिनिधियों के साथ अन्याय है, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों और संवैधानिक मर्यादाओं का भी खुला उल्लंघन है।
आपने मुख्यमंत्री पद की शपथ लेते समय निष्पक्ष और समान भाव से प्रदेश की समस्त जनता की सेवा करने का वचन दिया था। लेकिन वर्तमान परिदृश्य यह दर्शाता है कि सरकार एकतरफा, पक्षपातपूर्ण और संकीर्ण राजनीतिक दृष्टिकोण अपना रही है। यह बात भुला दी गई है कि कांग्रेस विधायकों के क्षेत्र में भी वही नागरिक रहते हैं जो करदाता हैं और जिन्हें समान रूप से सरकारी योजनाओं और विकास कार्यों का लाभ मिलना चाहिए। यदि लोकतांत्रिक सरकारें भी भेदभाव पर उतर आएं तो इससे जनता का लोकतांत्रिक व्यवस्था से विश्वास उठने लगता है।
इसके साथ ही यह भी अत्यंत गंभीर विषय है कि भाजपा विधायकों को मिलने वाली विकास निधि का 30 से 40 प्रतिशत हिस्सा पहले ही भ्रष्टाचार और कमीशन में चला जाता है। इसके पश्चात, नौकरशाही और ठेकेदारी तंत्र के माध्यम से शेष राशि में भी व्यापक कमीशनखोरी और बंदरबांट होती है। यदि मोटे तौर पर देखा जाए तो एक लाख रुपये में से केवल 30-35 हजार रुपये ही विकास कार्यों में उपयोग हो पाते हैं, शेष राशि भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाती है। यह बेहद चिंताजनक स्थिति है, जिससे प्रदेश की छवि देश के सबसे भ्रष्ट राज्यों में से एक के रूप में बनती जा रही है।
इस संदर्भ में मैं आपसे निम्नलिखित मांगें करता हूं:
1. सभी विधायकों को, चाहे वे किसी भी दल से हों, समान रूप से 15 करोड़ रुपये की विकास निधि प्रदान की जाए।
2. निधि के आवंटन और व्यय की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया जाए, जिससे भ्रष्टाचार और कमीशन पर नियंत्रण लगाया जा सके।
3. जिन अधिकारियों और ठेकेदारों पर भ्रष्टाचार या कमीशनखोरी के आरोप हैं, उनकी निष्पक्ष जांच कर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
मध्य प्रदेश की जनता ने जनप्रतिनिधियों को विकास के लिए चुना है, न कि भेदभाव और भ्रष्टाचार झेलने के लिए। यदि आपकी सरकार वास्तव में “सबका साथ, सबका विकास” के सिद्धांत में विश्वास करती है, तो इस अन्यायपूर्ण नीति को तुरंत समाप्त किया जाना चाहिए। आशा है कि आप प्रदेश की गिरती हुई प्रशासनिक और राजनीतिक छवि को गंभीरता से लेते हुए जनहित में निष्पक्ष, न्यायसंगत और पारदर्शी निर्णय लेंगे।