एमपी पुलिस कांस्टेबल भर्ती में बड़ा अपडेट, 7,500 रिक्तियों के लिए 23 फरवरी से 14 मार्च तक होंगे फिजिकल टेस्ट

मध्य प्रदेश में पुलिस भर्ती प्रक्रिया को लेकर अहम चरण की शुरुआत हो गई है। आरक्षक (कांस्टेबल) भर्ती के लिए आज 23 फरवरी से शारीरिक दक्षता परीक्षा प्रारंभ हो रही है, जो 14 मार्च तक लगातार आयोजित की जाएगी। प्रतिदिन सुबह 6 बजे से फिजिकल टेस्ट की कार्यवाही शुरू होगी। अभ्यर्थियों को निर्धारित समय से पहले परीक्षा केंद्र पर पहुंचना अनिवार्य किया गया है। परीक्षा में शामिल होने के लिए सभी उम्मीदवारों को अपने मूल प्रमाण पत्र, पहचान पत्र और आवश्यक दस्तावेज साथ लाना जरूरी है, अन्यथा प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी।

इस भर्ती प्रक्रिया के तहत प्रदेशभर में कुल 7,500 पदों को भरा जाना है। इससे पहले 15 दिसंबर 2025 को लिखित परीक्षा आयोजित की गई थी, जिसका परिणाम 25 जनवरी 2026 को घोषित किया गया। लिखित परीक्षा में सफल घोषित अभ्यर्थियों को अब शारीरिक दक्षता परीक्षा के लिए बुलाया गया है। यह परीक्षा प्रदेश के 10 प्रमुख शहरों—भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर, उज्जैन, सागर, रीवा, बालाघाट, रतलाम और मुरैना—में आयोजित की जा रही है।

भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाए रखने के लिए इस बार विशेष तकनीकी इंतजाम किए गए हैं। ग्वालियर जिले में SAF मैदान पर अभ्यर्थियों की दौड़ आयोजित होगी। यहां उम्मीदवारों को क्यूआर कोड से युक्त विशेष जैकेट पहनाई जाएगी। इस जैकेट पर अंकित क्यूआर कोड को प्रत्येक चरण में स्कैन किया जाएगा और इसे अभ्यर्थी के रोल नंबर से डिजिटल रूप से जोड़ा जाएगा, ताकि किसी प्रकार की गड़बड़ी या फर्जीवाड़े की संभावना खत्म की जा सके।

सुरक्षा व्यवस्था के तहत परीक्षा केंद्रों पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है। ग्वालियर में 64 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, जबकि हर 10 अभ्यर्थियों पर नजर रखने के लिए तीन पुलिसकर्मी तैनात रहेंगे। पहले दो दिनों में प्रतिदिन 200 अभ्यर्थियों को दौड़ में शामिल किया जाएगा, उसके बाद प्रतिदिन लगभग 400 अभ्यर्थियों की शारीरिक परीक्षा ली जाएगी। ग्वालियर और चंबल संभाग के आठ जिलों के उम्मीदवारों के लिए दो अलग-अलग परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं, जिससे परीक्षा प्रक्रिया सुव्यवस्थित ढंग से संचालित हो सके।

प्रशासन का दावा है कि इस बार भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता, तकनीकी निगरानी और सुरक्षा के उच्च मानक अपनाए गए हैं, ताकि योग्य और प्रतिभाशाली अभ्यर्थियों का निष्पक्ष चयन सुनिश्चित किया जा सके।