सिंहस्थ-2028 को देखते हुए मध्य प्रदेश पुलिस ने अभी से सुरक्षा तैयारियों को युद्ध स्तर पर तेज कर दिया है। इस बार पुलिस का जोर पारंपरिक निगरानी से आगे बढ़कर आधुनिक तकनीकों के अधिकतम इस्तेमाल पर है। भीड़ प्रबंधन, कानून-व्यवस्था और सुरक्षा व्यवस्था को पूरी तरह टेक्नोलॉजी-ड्रिवन बनाने की दिशा में पुलिस ने बड़े कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। इसी कड़ी में सिंहस्थ मेला क्षेत्र की निगरानी के लिए देश के सबसे अत्याधुनिक फिक्स्ड विंग ड्रोन खरीदने की प्रक्रिया शुरू की गई है।
6 घंटे उड़ान और 100 किमी तक निगरानी की क्षमता
एमपी पुलिस जिन फिक्स्ड विंग ड्रोन को खरीदने जा रही है, उनकी क्षमता सामान्य ड्रोन से कहीं अधिक होगी। ये हाईटेक ड्रोन एक बार उड़ान भरने के बाद लगातार 6 घंटे तक हवा में रह सकते हैं और लगभग 100 किलोमीटर तक का दायरा कवर करने में सक्षम होंगे। इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि पुलिस आसमान से एक साथ कई जिलों और बड़े इलाकों पर नजर रख सकेगी, जिससे भीड़ की गतिविधियों पर तुरंत कंट्रोल संभव हो पाएगा।
दिन-रात लाइव मॉनिटरिंग की सुविधा
एसएसपी रेडियो रियाज इकबाल के मुताबिक, एमपी पुलिस एक नया ड्रोन विंग सेटअप तैयार कर रही है। इंदौर में विशेष ड्रोन स्कूल की स्थापना की जा रही है, जहां से प्रशिक्षित मास्टर ट्रेनर तैयार किए जाएंगे। यही स्कूल इन हाईटेक ड्रोन का बेस सेंटर भी होगा। इन ड्रोन की खासियत यह है कि ये दिन और रात, दोनों समय उड़ान भर सकते हैं और इनसे मिलने वाला लाइव वीडियो कंट्रोल रूम में सीधे मॉनिटर किया जा सकेगा।
स्मार्ट पुलिसिंग को मिलेगा नया आयाम
हाईटेक ड्रोन के इस्तेमाल से प्रदेश में स्मार्ट पुलिसिंग को नई मजबूती मिलेगी। अपराधियों और संदिग्ध गतिविधियों पर रियल-टाइम नजर रखी जा सकेगी। सिंहस्थ मेला परिसर में भारी भीड़ के दौरान ट्रैफिक, प्रवेश-निकास और वीआईपी मूवमेंट को सुचारु रखने में ये ड्रोन अहम भूमिका निभाएंगे। इसके साथ ही आपदा प्रबंधन, दंगा नियंत्रण और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में त्वरित कार्रवाई के लिए भी ड्रोन का उपयोग किया जाएगा।
ड्रोन के दुरुपयोग पर भी रहेगी सख्त नजर
पुलिस सिर्फ ड्रोन का इस्तेमाल ही नहीं करेगी, बल्कि ड्रोन के गलत इस्तेमाल से निपटने के लिए एंटी-ड्रोन तकनीक भी अपनाई जाएगी। संदिग्ध या गैर-कानूनी ड्रोन गतिविधियों की पहचान कर उन्हें निष्क्रिय करने की व्यवस्था भी सुरक्षा योजना का हिस्सा होगी। इससे सिंहस्थ जैसे बड़े धार्मिक आयोजनों में किसी भी तरह की तकनीकी साजिश को समय रहते रोका जा सकेगा।
क्या होता है फिक्स्ड विंग ड्रोन
फिक्स्ड विंग ड्रोन का डिजाइन विमान की तरह होता है, जिसमें बड़े पंख लगे होते हैं। ये मल्टी-रोटर ड्रोन की तुलना में कहीं अधिक दूरी तय करने में सक्षम होते हैं। कम बैटरी खपत में ये लंबे समय तक हवा में बने रहते हैं और बड़े क्षेत्रों की निगरानी कर सकते हैं। यही वजह है कि फिक्स्ड विंग ड्रोन का उपयोग बॉर्डर पेट्रोलिंग, बड़े सर्च ऑपरेशन और लॉन्ग-रेंज सर्विलांस के लिए किया जाता है।
इंदौर बनेगा प्रदेश का नोडल ड्रोन ट्रेनिंग सेंटर
ड्रोन ऑपरेशन को मजबूत करने के लिए इंदौर स्थित पुलिस रेडियो ट्रेनिंग स्कूल (PRTS) में विशेष ड्रोन ट्रेनिंग स्कूल शुरू किया जा रहा है। इसे पूरे प्रदेश का नोडल ड्रोन ट्रेनिंग सेंटर बनाया जाएगा। यहां से मध्य प्रदेश के सभी जिलों के लिए ड्रोन पायलट और पे-लोड ऑपरेटर यानी को-पायलट तैयार किए जाएंगे।
50 पुलिसकर्मी बनेंगे मास्टर ट्रेनर
शुरुआती चरण में तकनीकी रूप से दक्ष 50 पुलिसकर्मियों को विशेष ड्रोन प्रशिक्षण दिया जाएगा। इन कर्मियों को सिर्फ ड्रोन उड़ाने की ही नहीं, बल्कि ड्रोन और एंटी-ड्रोन तकनीक की भी गहन जानकारी दी जाएगी। ट्रेनिंग पूरी होने के बाद यही 50 पुलिसकर्मी मास्टर ट्रेनर के रूप में अलग-अलग जिलों में तैनात किए जाएंगे।
प्रदेश में खुलेंगे 7 ड्रोन ऑपरेशन सेंटर
एमपी पुलिस की योजना के तहत भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर, उज्जैन समेत प्रदेश के कुल 7 शहरों में ड्रोन ऑपरेशन सेंटर स्थापित किए जाएंगे। इन सेंटरों से ड्रोन संचालन, निगरानी और आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई की जाएगी। सिंहस्थ-2028 के दौरान यह पूरा ड्रोन नेटवर्क सुरक्षा व्यवस्था की रीढ़ साबित होने वाला है।