मध्य प्रदेश में रजक समाज को पूरे प्रदेश में अनुसूचित जाति का दर्जा देने की मांग को लेकर गुरुवार को भोपाल में बड़ा प्रदर्शन हुआ। अरेरा कॉलोनी स्थित एनसीपी ग्राउंड में विभिन्न जिलों से पहुंचे लोगों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और एक समान सामाजिक श्रेणी लागू करने की मांग दोहराई। प्रदर्शन के बाद 11 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री निवास पहुंचा और ज्ञापन सौंपा।
प्रदर्शनकारियों का मुख्य तर्क था कि एक ही राज्य में एक ही जाति के साथ अलग-अलग वर्गीकरण किया जाना प्रशासनिक और सामाजिक विसंगति है। समाज के प्रतिनिधियों ने कहा कि इस स्थिति का असर खास तौर पर युवाओं पर पड़ रहा है, क्योंकि शिक्षा और रोजगार में मिलने वाले आरक्षण व अन्य लाभ जिलों के आधार पर बदल जाते हैं।
“एक ही राज्य में एक ही जाति को अलग-अलग श्रेणी में रखना अन्यायपूर्ण है।” — समाज के प्रतिनिधि
तीन जिलों में एससी, बाकी में ओबीसी का सवाल
संयुक्त मोर्चा के बैनर तले आयोजित इस कार्यक्रम में रजक समाज के पदाधिकारियों ने कहा कि फिलहाल भोपाल, सीहोर और रायसेन जिलों में समुदाय को अनुसूचित जाति की मान्यता मिली हुई है। वहीं प्रदेश के अन्य जिलों में इसी समुदाय को अन्य पिछड़ा वर्ग में रखा गया है। समाज का कहना है कि इस असमान वर्गीकरण से नीति का लाभ समान रूप से नहीं पहुंचता।
नेताओं ने सभा में यह भी कहा कि रजक समुदाय ऐतिहासिक रूप से पारंपरिक धुलाई कार्य से जुड़ा रहा है और लंबे समय से सामाजिक-आर्थिक पिछड़ेपन का सामना करता आया है। इसी आधार पर वे पूरे मध्य प्रदेश में एक समान श्रेणी की मांग लगातार रखते रहे हैं।
पुरानी मांग पर फिर जोर, सरकार को चेतावनी
समाज के प्रतिनिधियों के मुताबिक यह मांग नई नहीं है। पिछले कई वर्षों में अलग-अलग सरकारों को ज्ञापन दिए गए, धरने-प्रदर्शन हुए और जनप्रतिनिधियों से मुलाकातें भी की गईं। इसके बावजूद अब तक कोई अंतिम निर्णय नहीं हो पाया। गुरुवार की सभा में वक्ताओं ने कहा कि अगर जल्द निर्णय नहीं हुआ तो आंदोलन को प्रदेशव्यापी रूप दिया जाएगा।
सभा के बाद प्रदर्शनकारी सीएम हाउस तक रैली निकालना चाहते थे। पुलिस ने रास्ते में बेरिकेड्स लगाकर भीड़ को आगे बढ़ने से रोका। इस दौरान हल्की धक्का-मुक्की की स्थिति बनी, लेकिन बाद में बातचीत के बाद प्रतिनिधिमंडल को आगे जाने की अनुमति दी गई।
सीएम निवास पर ज्ञापन, आगे रणनीति का संकेत
अंततः 11 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री निवास पहुंचा और अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपा। समाज के नेताओं ने बताया कि सरकार की ओर से मांगों पर उचित विचार का आश्वासन दिया गया है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि ठोस निर्णय नहीं लिया गया तो आगे की रणनीति घोषित की जाएगी।
प्रदेश में सामाजिक वर्गीकरण से जुड़ा यह मुद्दा प्रशासनिक, कानूनी और राजनीतिक स्तर पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। फिलहाल रजक समाज की नजर सरकार की अगली कार्रवाई पर है, क्योंकि उनकी मांग का केंद्र बिंदु यही है कि पूरे राज्य में समुदाय की श्रेणी एक समान तय की जाए।