मध्य प्रदेश में सरकारी नौकरियों की बाट जोह रहे शिक्षित बेरोजगारों का धैर्य अब जवाब देने लगा है। प्रदेश की राजधानी भोपाल में बड़ी संख्या में एकत्रित हुए अभ्यर्थियों ने राज्य सरकार की भर्ती नीतियों पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। युवाओं का मुख्य आक्रोश इस बात को लेकर है कि जब सरकारी विभागों में लाखों पद रिक्त पड़े हैं, तो भर्ती प्रक्रिया इतनी धीमी और सीमित क्यों है?
प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया कि सरकार रोजगार के नाम पर केवल खानापूर्ति कर रही है। उनका कहना है कि पिछले कई वर्षों से विभिन्न विभागों में नियमित भर्तियां नहीं निकली हैं, जिसके कारण लाखों युवाओं का भविष्य अधर में लटका हुआ है।
सवालों के घेरे में भर्ती प्रक्रिया
भोपाल में हुए इस प्रदर्शन के दौरान अभ्यर्थियों ने आंकड़ों का हवाला देते हुए सरकार को घेरा। प्रदर्शनकारियों का तर्क है कि सामान्य प्रशासन विभाग और अन्य प्रमुख विभागों में बड़ी संख्या में पद खाली हैं। इसके बावजूद, कर्मचारी चयन मंडल (ESB) और मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) द्वारा जारी की जाने वाली विज्ञप्तियों में पदों की संख्या बेहद कम होती है।
“हम सालों से तैयारी कर रहे हैं, लेकिन सरकार या तो भर्ती निकालती नहीं है, और अगर निकालती भी है तो ऊंट के मुंह में जीरे के समान। क्या यही युवाओं के भविष्य की चिंता है?” — प्रदर्शनकारी अभ्यर्थी
आयु सीमा और ओवरएज का संकट
युवाओं की नाराजगी का एक बड़ा कारण आयु सीमा भी है। अभ्यर्थियों ने बताया कि भर्ती प्रक्रिया में होने वाली देरी के कारण हजारों छात्र ओवरएज हो रहे हैं। एक बार आयु सीमा पार कर जाने के बाद वे परीक्षा में बैठने के योग्य नहीं रह जाते, जिससे उनकी सालों की मेहनत बेकार हो जाती है। अभ्यर्थियों ने मांग की है कि कोरोना काल और भर्ती में हुई देरी को देखते हुए आयु सीमा में छूट दी जानी चाहिए और रुकी हुई परीक्षाओं का परिणाम जल्द घोषित किया जाए।
कैलेंडर और पारदर्शिता की मांग
प्रदर्शनकारी युवाओं ने सरकार के सामने स्पष्ट मांगें रखी हैं। वे चाहते हैं कि भर्ती परीक्षाओं का एक निश्चित वार्षिक कैलेंडर जारी किया जाए और उसका कड़ाई से पालन हो। इसके अलावा, पटवारी भर्ती परीक्षा, शिक्षक पात्रता परीक्षा और पुलिस आरक्षक भर्ती जैसी लंबित प्रक्रियाओं को पारदर्शी तरीके से पूरा किया जाए।
गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब युवाओं ने इस तरह का विरोध दर्ज कराया है। इससे पहले भी इंदौर और भोपाल में कई बार आंदोलन हो चुके हैं, लेकिन अभ्यर्थियों का आरोप है कि हर बार उन्हें केवल आश्वासन ही मिलता है। अब देखना यह होगा कि इस विरोध प्रदर्शन के बाद सरकार भर्ती प्रक्रिया में क्या तेजी लाती है।