Indore News: इंदौर संसदीय क्षेत्र के देपालपुर, राऊ और सांवेर विधानसभा के ग्रामीण हिस्सों में हुई आकस्मिक और असामयिक वर्षा ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। कई गांवों से गेहूं, चना और अन्य रबी फसलों को नुकसान की सूचना मिलने के बाद सांसद शंकर लालवानी ने क्षेत्रीय दौरा किया। उन्होंने खेतों तक पहुंचकर वास्तविक स्थिति का निरीक्षण किया और प्रभावित किसानों से सीधे चर्चा की।
दौरे के दौरान किसानों ने बताया कि कटाई से पहले हुई बारिश और तेज हवा का असर उत्पादन पर पड़ सकता है। कई स्थानों पर खड़ी फसलें जमीन पर गिर गईं, जिससे नुकसान का दायरा बढ़ा है। किसानों ने प्रशासनिक सर्वे और राहत प्रक्रिया में तेजी की मांग भी रखी, ताकि नुकसान का समय पर आकलन हो सके और मुआवजा प्रक्रिया शुरू हो।
मौके से मिली रिपोर्ट के बाद सांसद ने इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा से चर्चा की। बातचीत में प्रभावित क्षेत्रों में विशेष सर्वे दल गठित कर नुकसान का वैज्ञानिक और पारदर्शी आकलन कराने पर जोर दिया गया। प्रशासनिक स्तर पर यह भी तय किया गया कि अलग-अलग विभागों की रिपोर्ट के बजाय समन्वित तरीके से जमीनी सर्वे कराया जाए, ताकि आंकड़ों में एकरूपता बनी रहे।
राजस्व और कृषि विभाग को संयुक्त सर्वे का निर्देश
सांसद द्वारा मुद्दा प्राथमिकता से उठाए जाने के बाद कलेक्टर शिवम वर्मा ने राजस्व और कृषि विभाग के अधिकारियों को संयुक्त सर्वे करने के निर्देश दिए। अधिकारियों से कहा गया है कि प्रभावित गांवों में शीघ्र पहुंचकर नुकसान का आकलन करें और जल्द प्रतिवेदन प्रस्तुत करें। इस कदम का उद्देश्य यह है कि राहत और दावा निपटान की प्रक्रिया फाइलों में लंबित न रहे और समयबद्ध निर्णय हो सके।
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार सर्वे में फसल की स्थिति, खेतवार क्षति, गिर चुकी फसल का प्रतिशत और संभावित उत्पादन हानि जैसे बिंदुओं को शामिल किया जाएगा। स्थानीय स्तर पर पटवारी, कृषि विस्तार अमला और संबंधित अधिकारी मिलकर रिपोर्ट तैयार करेंगे। पारदर्शिता बनाए रखने के लिए प्रभावित किसानों से मौके पर जानकारी लेकर दस्तावेजी मिलान भी किया जाएगा।
फसल बीमा दावों के त्वरित निराकरण पर जोर
चर्चा में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत पंजीकृत किसानों के दावों के शीघ्र निराकरण का मुद्दा भी प्रमुख रहा। संबंधित बीमा कंपनियों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करने पर सहमति बनी, ताकि पात्र किसानों को राहत राशि समयबद्ध रूप से मिल सके। प्रशासन, विभागीय अमले और बीमा कंपनियों के बीच समन्वय को इस प्रक्रिया का प्रमुख आधार माना गया है।
कई किसानों का कहना है कि मौसम की मार के बाद सबसे बड़ी जरूरत त्वरित सत्यापन और भुगतान की होती है। इसी कारण स्थानीय स्तर पर सर्वे और बीमा दावे की प्रक्रिया एक साथ आगे बढ़ाने की रूपरेखा पर भी चर्चा हुई। यदि रिपोर्ट समय पर तैयार होती है तो राहत वितरण और बीमा निपटान में देरी कम की जा सकती है।
सांसद शंकर लालवानी ने कहा कि प्राकृतिक आपदा से प्रभावित हर किसान परिवार को शासन के नियमानुसार अधिकतम सहायता दिलाने के लिए हर स्तर पर प्रयास किए जाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि प्राथमिक लक्ष्य त्वरित राहत उपलब्ध कराना है और इसके लिए प्रशासन, जनप्रतिनिधि और बीमा कंपनियां समन्वित तरीके से काम करेंगी।
“प्राकृतिक आपदा से प्रभावित प्रत्येक किसान परिवार को शासन की नियमानुसार अधिकतम सहायता दिलाने के लिए हर स्तर पर प्रयास किए जाएंगे।” — शंकर लालवानी, सांसद
क्षेत्र के किसानों को आश्वस्त किया गया है कि नुकसान के आकलन और सहायता प्रक्रिया को प्राथमिकता दी जाएगी। प्रशासनिक मशीनरी को सक्रिय करते हुए प्रभावित गांवों से शीघ्र प्रतिवेदन लेने की पहल शुरू कर दी गई है। अब आगे की कार्रवाई संयुक्त सर्वे रिपोर्ट और बीमा दावों के निपटान की गति पर निर्भर करेगी, जिससे किसानों को वास्तविक राहत मिल सके।