मध्य प्रदेश में मौसम ने एक बार फिर करवट ली है। कड़ाके की ठंड और घने कोहरे के बीच अब प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश का खतरा मंडरा रहा है। मौसम विभाग (IMD) ने राज्य के 28 जिलों के लिए अलर्ट जारी किया है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार वर्तमान में एक साथ दो शक्तिशाली मौसम प्रणालियां सक्रिय हैं। इसमें एक साइक्लोनिक सर्कुलेशन और दूसरी ट्रफ लाइन शामिल है। इन प्रणालियों के प्रभाव से अरब सागर से नमी आ रही है जो प्रदेश के तापमान और वातावरण को प्रभावित कर रही है।
साइक्लोनिक सर्कुलेशन और ट्रफ लाइन का प्रभाव
मौसम केंद्र भोपाल के अनुसार दक्षिण-पश्चिमी राजस्थान के ऊपर एक साइक्लोनिक सर्कुलेशन बना हुआ है। इसके साथ ही एक ट्रफ लाइन भी गुजर रही है। इन दोनों के संयुक्त प्रभाव से मध्य प्रदेश के पश्चिमी और मध्य हिस्सों में बादलों का डेरा जम गया है। मौसम विभाग का अनुमान है कि अगले 24 से 48 घंटों के भीतर प्रदेश के 28 जिलों में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। कुछ स्थानों पर गरज-चमक के साथ ओलावृष्टि की भी आशंका जताई गई है।
इन जिलों में जारी किया गया अलर्ट
मौसम विभाग ने ग्वालियर, चंबल, रीवा और सागर संभाग के जिलों में विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। जिन जिलों में बारिश का अलर्ट जारी किया गया है उनमें भोपाल, इंदौर, उज्जैन, जबलपुर, ग्वालियर, शिवपुरी, गुना, दतिया, अशोकनगर, मुरैना, भिंड और श्योपुर शामिल हैं। इसके अलावा छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी में भी मौसम बिगड़ने की संभावना है। इन क्षेत्रों में आसमान में घने बादल छाए रहेंगे और दृश्यता कम रहने के आसार हैं।
ठंड और कोहरे की दोहरी मार
बारिश के अलर्ट के बीच प्रदेश के कई जिले पहले से ही भीषण ठंड और कोहरे की चपेट में हैं। सुबह के समय दृश्यता 50 मीटर से भी कम दर्ज की जा रही है जिससे सड़क और रेल यातायात प्रभावित हुआ है। मौसम विभाग का कहना है कि बारिश के बाद जब बादल छंटेंगे तो न्यूनतम तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस की और गिरावट आ सकती है। इससे ठिठुरन और बढ़ेगी। वर्तमान में खजुराहो, नौगांव और ग्वालियर में रात का तापमान सामान्य से काफी नीचे बना हुआ है।
खेती और जनजीवन पर असर
बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि की संभावना ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। रबी की फसलों विशेषकर गेहूं और चने के लिए हल्की बारिश तो फायदेमंद हो सकती है लेकिन ओलावृष्टि नुकसानदेह साबित होगी। कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी है कि वे कटी हुई फसलों को सुरक्षित स्थानों पर रखें। आम जनजीवन की बात करें तो अचानक बदले इस मौसम से सर्दी-जुकाम और वायरल बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है। स्वास्थ्य विभाग ने बच्चों और बुजुर्गों को ठंड से बचने की सलाह दी है।
पिछले वर्षों का संदर्भ
मध्य प्रदेश में जनवरी और फरवरी के महीने में इस तरह का मौसम पहले भी देखा गया है। पिछले साल भी इसी अवधि के दौरान पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से मालवा और निमाड़ अंचल में बेमौसम बारिश हुई थी। हालांकि इस बार साइक्लोनिक सर्कुलेशन की तीव्रता अधिक बताई जा रही है। मौसम विभाग लगातार उपग्रह चित्रों के माध्यम से स्थिति की निगरानी कर रहा है और जिला प्रशासन को अपडेट भेज रहा है।
आने वाले दिनों में यदि नमी का प्रवाह इसी तरह बना रहा तो बारिश का दायरा बढ़ सकता है। फिलहाल नागरिकों को सलाह दी गई है कि वे मौसम की जानकारी लेकर ही यात्रा की योजना बनाएं और बिजली कड़कने के दौरान पेड़ों या बिजली के खंभों के नीचे शरण न लें।