मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग के अंतर्गत मेडिकल ऑफिसर और विशेषज्ञ डॉक्टरों की भर्ती से जुड़े विवाद पर इंदौर हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है। जस्टिस जय कुमार पिल्लई ने इस मामले में दायर विभिन्न रिट याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई करते हुए फैसला दिया, जिससे सैकड़ों योग्य डॉक्टरों को राहत मिली है। कोर्ट के इस आदेश से उन अभ्यर्थियों के लिए दोबारा अवसर खुल गया है, जिन्हें तकनीकी आधार पर भर्ती प्रक्रिया से बाहर कर दिया गया था।
याचिकाकर्ताओं की ओर से रखे गए तर्क
मामले में याचिकाकर्ताओं की तरफ से सीनियर एडवोकेट तुषार सोडानी ने पक्ष रखा। उन्होंने अदालत को बताया कि भर्ती विज्ञापन में कहीं भी पोस्ट ग्रेजुएट एडिशनल रजिस्ट्रेशन को अनिवार्य योग्यता के रूप में उल्लेखित नहीं किया गया था। इसके बावजूद इसी शर्त के आधार पर कई उम्मीदवारों की उम्मीदवारी रद्द कर दी गई, जो समानता और अवसर की संवैधानिक गारंटी का उल्लंघन है।
एडिशनल रजिस्ट्रेशन पर कोर्ट की स्पष्ट टिप्पणी
हाईकोर्ट ने दलीलों से सहमति जताते हुए कहा कि पोस्ट ग्रेजुएट एडिशनल रजिस्ट्रेशन केवल वांछनीय योग्यता है, इसे अनिवार्य नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने यह भी कहा कि भर्ती प्रक्रिया के बीच नई शर्त जोड़ना नियमों को बदलने जैसा है, जो न्यायसंगत नहीं है और कानून के विरुद्ध है।
कट ऑफ तारीख से पहले PG करने वालों को राहत
अदालत ने MPPSC और राज्य सरकार को निर्देश दिए कि जिन अभ्यर्थियों ने निर्धारित कट ऑफ तिथि से पहले पोस्ट ग्रेजुएट डिग्री हासिल कर ली थी, उन्हें केवल एडिशनल रजिस्ट्रेशन न होने के आधार पर भर्ती प्रक्रिया से बाहर न किया जाए। ऐसे सभी उम्मीदवारों को दोबारा चयन प्रक्रिया में शामिल किया जाए।
सैकड़ों डॉक्टरों को मिला दोबारा मौका
इस फैसले के बाद उन सभी डॉक्टरों को बड़ी राहत मिली है, जो आवश्यक योग्यता होने के बावजूद तकनीकी कारणों से बाहर कर दिए गए थे। अब कट ऑफ तारीख से पहले PG डिग्री प्राप्त करने वाले अभ्यर्थी फिर से MPPSC की भर्ती प्रक्रिया में भाग ले सकेंगे, जिससे योग्य डॉक्टरों के साथ न्याय सुनिश्चित होगा।