मध्यप्रदेश के बुरहानपुर जिले का बोरसर गांव इन दिनों अपनी अनोखी पहल को लेकर पूरे मध्यप्रदेश में चर्चा का केंद्र बना हुआ है। यह गांव अब ‘गाली-मुक्त मॉडल गांव’ के रूप में नई पहचान बना चुका है, जहां भाषा में शुद्धता और व्यवहार में संस्कार को प्राथमिकता दी जा रही है।
गांव के सरपंच और सचिव द्वारा जारी आदेश के बाद पूरे गांव में गाली-गलौज पर पूर्ण प्रतिबंध लागू कर दिया गया है। गांव की दीवारों और सार्वजनिक स्थानों पर स्पष्ट संदेश लिखे गए हैं, जो लोगों को सभ्य भाषा अपनाने के लिए प्रेरित करते हैं।
इस नियम को प्रभावी बनाने के लिए सख्त प्रावधान भी किए गए हैं। यदि कोई व्यक्ति गाली देता हुआ पकड़ा जाता है, तो उस पर 500 रुपये का जुर्माना लगाया जाता है और साथ ही एक घंटे तक गांव की सफाई करने की सजा भी दी जाती है।
गांव के युवाओं और ग्रामीणों का कहना है कि इस पहल के बाद माहौल में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। पहले जहां आपसी विवाद और कटुता अधिक थी, वहीं अब गांव में शांति, सम्मान और सकारात्मकता का माहौल बन गया है।
बोरसर गांव की यह पहल सामाजिक सुधार की एक प्रेरणादायक मिसाल बन चुकी है। यह न केवल आसपास के गांवों को जागरूक कर रही है, बल्कि पूरे प्रदेश में एक सकारात्मक संदेश दे रही है कि बदलाव की शुरुआत छोटी पहल से भी हो सकती है।