एमपी में फिर बढ़ा कर्ज बोझ, 6300 करोड़ की उधारी से डीए और लाड़ली बहना योजना की राशि चुकाएगी सरकार

मध्य प्रदेश की मोहन सरकार ने एक बार फिर बाजार से बड़ा कर्ज उठाया है। इस बार 6300 करोड़ रुपये की राशि उधार ली गई है, जिसका उद्देश्य सरकारी कर्मचारियों को महंगाई भत्ता (डीए) भुगतान और लाड़ली बहना योजना की हितग्राहियों को राशि वितरण सुनिश्चित करना बताया जा रहा है। इस ताजा कर्ज के बाद चालू वित्तीय वर्ष में राज्य सरकार द्वारा लिया गया कुल कर्ज बढ़कर 79,100 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। सरकार ने यह उधारी प्रतिभूति (सिक्योरिटी) की नीलामी के जरिए जुटाई है, जिसका औपचारिक भुगतान निर्धारित तिथि पर किया जाएगा।

फरवरी के बाद होली पर फिर उधारी

फरवरी महीने में सरकार ने लगातार तीन मंगलवार को बाजार से कर्ज उठाया था। 17 फरवरी को लिए गए ऋण के बाद कुल उधारी 72,900 करोड़ रुपये तक पहुंच गई थी। अब एक सप्ताह का अंतराल देने के बाद होली के मौके पर फिर से उधार लिया गया है। इससे साफ है कि वित्तीय आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए सरकार को लगातार बाजार पर निर्भर रहना पड़ रहा है।

चार हिस्सों में बांटा गया 6300 करोड़ का लोन

वित्त विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार 6300 करोड़ रुपये के इस कर्ज को चार अलग-अलग अवधि में विभाजित किया गया है। पहला ऋण 1800 करोड़ रुपये का है, जिसे 9 वर्षों में छमाही ब्याज के आधार पर चुकाया जाएगा। दूसरा 1600 करोड़ रुपये का कर्ज 13 वर्षों के लिए लिया गया है। तीसरी किस्त 1600 करोड़ रुपये की है, जिसकी अवधि 15 वर्ष तय की गई है। चौथा और अंतिम 1600 करोड़ रुपये का ऋण 23 वर्षों की लंबी अवधि के लिए उठाया गया है। इन सभी को मिलाकर कुल कर्ज 6300 करोड़ रुपये बैठता है।

17 फरवरी को भी उठाया गया था बहु-अवधि ऋण

इससे पहले 17 फरवरी को भी राज्य सरकार ने चार अलग-अलग अवधियों के लिए ऋण लिया था। उस समय 1200 करोड़ रुपये 8 साल के लिए, 1400 करोड़ रुपये 13 साल के लिए, 1600 करोड़ रुपये 19 साल के लिए और 1400 करोड़ रुपये 23 साल के लिए उधार लिए गए थे। लगातार हो रही उधारी से स्पष्ट है कि सरकार वित्तीय दायित्वों और कल्याणकारी योजनाओं के खर्च को पूरा करने के लिए बाजार से संसाधन जुटा रही है।

वित्तीय दबाव और बढ़ती देनदारियां

महंगाई भत्ता भुगतान और सामाजिक योजनाओं के लिए संसाधन जुटाना सरकार की प्राथमिकता है, लेकिन लगातार बढ़ते कर्ज से राज्य की वित्तीय स्थिति पर दबाव भी बढ़ रहा है। 79,100 करोड़ रुपये की उधारी सीमा तक पहुंचना यह दर्शाता है कि चालू वित्तीय वर्ष में सरकार ने बड़े पैमाने पर बाजार से धन जुटाया है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार इन ऋणों का प्रबंधन किस प्रकार करती है और राजकोषीय संतुलन बनाए रखने के लिए क्या रणनीति अपनाती है।