प्रोजेक्ट चीता के तहत प्रस्तावित कूनो-गांधीसागर चीता लैंडस्केप का विचार अभी कागज़ों में ही अधूरा है, लेकिन कूनो नेशनल पार्क के चीते खुद इस दिशा में पहल कर रहे हैं। बीते महीनों में कई बार ऐसा देखा गया है कि कूनो के चीते राजस्थान की सीमाओं तक पहुंच गए। इसका मतलब साफ है कि वे अपने लिए नए इलाके तलाश रहे हैं। श्योपुर और मध्यप्रदेश के आसपास के जिलों से निकलकर राजस्थान के तीन अलग-अलग जिलों तक चीतों की आवाजाही यह संकेत देती है कि यह प्राकृतिक गलियारा अपने आप बन रहा है।
चीतों का राजस्थान की तरफ बढ़ना
पिछले करीब 20 महीनों में तीन अलग-अलग चीते राजस्थान की सीमा तक जा चुके हैं। हालांकि हर बार कूनो प्रबंधन की टीमों ने इन्हें रेस्क्यू कर वापस लाने का काम किया, लेकिन यह बात साफ है कि दुनिया का सबसे तेज धावक यह जानवर अब कूनो और आसपास के जंगलों से बाहर भी अपने लिए जगह तलाश रहा है। 26 दिसंबर 2023 से 11 अगस्त 2025 के बीच नर चीता अग्नि, नर चीता पवन और मादा चीता ज्वाला अलग-अलग रास्तों से राजस्थान में दाखिल हो चुके हैं।
राजस्थान में पहुंचने वाले चीते
1. मादा चीता ज्वाला – सवाईमाधोपुर
11 अगस्त 2025 को ज्वाला कूनो से निकलकर चंबल नदी पार कर राजस्थान के सवाईमाधोपुर जिले की सीमा में दाखिल हो गई। अगले दिन 12 अगस्त को वन विभाग ने उसे सवाईमाधोपुर जिले की खंडार तहसील के ग्राम करीरा से सुरक्षित पकड़कर कूनो वापस लाया। यह जगह एमपी-राजस्थान बॉर्डर से करीब 30 किलोमीटर दूर है।
2. नर चीता पवन – करौली
4 मई 2024 को नर चीता पवन कूनो से निकलकर राजस्थान के करौली जिले में पहुंच गया था। बाद में उसे भी वापस लाया गया। हालांकि, अफसोसजनक बात यह रही कि 27 अगस्त 2024 को पवन की मौत हो गई। वह कूनो की ही सीमा में नाले में डूब गया था।
3. नर चीता अग्नि – बारां
26 दिसंबर 2023 को नर चीता अग्नि राजस्थान के बारां जिले की सीमा में पहुंच गया था। इसके बाद रेस्क्यू टीम ने उसे ट्रैंक्विलाइज कर सुरक्षित तरीके से कूनो वापस ले जाया।
35 महीनों में 8 जिलों तक पहुंचे चीते
17 सितंबर 2022 को जब से प्रोजेक्ट चीता शुरू हुआ है, तब से अब तक यानी 35 महीनों में चीतों की आवाजाही आठ जिलों तक दर्ज की गई है। मध्यप्रदेश में ये श्योपुर, मुरैना, ग्वालियर, शिवपुरी और अशोकनगर तक घूम चुके हैं, जबकि राजस्थान में बारां, करौली और सवाईमाधोपुर की सीमाओं तक पहुंच चुके हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में इनके क्षेत्र और भी बढ़ेंगे, क्योंकि यह प्रजाति खुले इलाकों में लंबे दायरे में विचरण करती है।
17 हजार वर्ग किलोमीटर का प्रस्तावित लैंडस्केप
वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (WII), देहरादून और अन्य विशेषज्ञों ने चीतों के लिए लगभग 17,000 वर्ग किलोमीटर का लैंडस्केप प्रस्तावित किया है। इसमें मध्यप्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के 18 जिले शामिल किए गए हैं। लेकिन चूंकि यह पूरा लैंडस्केप अभी आधिकारिक रूप से तैयार नहीं है, इसलिए जब भी कोई चीता सीमा पार करता है, तो उसे पकड़कर वापस लाना पड़ता है। अगर यह लैंडस्केप प्री-बेस, ट्रेंड टीमें और अन्य प्रबंधन सुविधाओं के साथ विकसित हो जाए, तो भविष्य में चीतों को बार-बार रेस्क्यू की जरूरत नहीं होगी।
वन विभाग की प्रतिक्रिया
कूनो नेशनल पार्क के डीएफओ आर. थिरुकुराल का कहना है कि फिलहाल चीते कूनो में अच्छे से सर्वाइव कर रहे हैं और खुले जंगलों में सहजता से घूम रहे हैं। यही वजह है कि वे कभी-कभी राजस्थान तक पहुंच जाते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि चीता लैंडस्केप को लेकर प्रक्रिया जारी है। जैसे ही यह प्रोजेक्ट पूरी तरह तैयार होगा, चीतों की निगरानी और प्रबंधन आसान हो जाएगा।