धार भोजशाला: बसंत पंचमी पर नमाज की व्यवस्था पर मुस्लिम समाज की आपत्ति, प्रशासन पर भेदभाव के आरोप

मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित ऐतिहासिक भोजशाला एक बार फिर विवादों के केंद्र में है। आगामी बसंत पंचमी पर्व को देखते हुए जिला प्रशासन द्वारा बनाई गई रूपरेखा पर मुस्लिम समाज ने गहरा असंतोष व्यक्त किया है। समाज के प्रतिनिधियों ने नमाज अदा करने की व्यवस्था को लेकर अपनी आपत्ति दर्ज कराई है और प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

मुस्लिम समाज का कहना है कि प्रशासन ने त्यौहार के मद्देनजर जो इंतजाम किए हैं, वे व्यावहारिक नहीं हैं। इस संबंध में समाज के एक प्रतिनिधिमंडल ने स्थानीय अधिकारियों से मुलाकात कर अपनी बात रखी है। उनका आरोप है कि प्रशासन का रवैया इस बार बदला हुआ नजर आ रहा है, जिससे समुदाय में नाराजगी है।

प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल

विरोध दर्ज कराते हुए मुस्लिम पक्ष ने कहा कि भोजशाला में नमाज के लिए निर्धारित समय और स्थान को लेकर जो बदलाव किए जा रहे हैं, वे उन्हें स्वीकार्य नहीं हैं। उनका कहना है कि प्रशासन को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के पुराने आदेशों और परंपराओं का सम्मान करना चाहिए। प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि बसंत पंचमी के आयोजनों को प्राथमिकता देते हुए उनके धार्मिक अधिकारों को सीमित करने का प्रयास किया जा रहा है।

इस मामले को लेकर मुस्लिम समाज ने प्रशासन को एक ज्ञापन भी सौंपा है, जिसमें मांग की गई है कि नमाज के दौरान कोई व्यवधान न हो और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाएं। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर विचार नहीं किया गया, तो वे आगे की रणनीति पर विचार करेंगे।

भोजशाला का ऐतिहासिक संदर्भ

धार की भोजशाला एएसआई (ASI) संरक्षित स्मारक है, जो लंबे समय से हिंदू और मुस्लिम समुदाय के बीच विवाद का विषय रहा है। हिंदू पक्ष इसे राजा भोज द्वारा स्थापित मां वाग्देवी का मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला की मस्जिद बताता है।

एएसआई की मौजूदा व्यवस्था के तहत, यहां प्रत्येक मंगलवार को हिंदुओं को पूजा-अर्चना और प्रत्येक शुक्रवार को मुस्लिमों को नमाज अदा करने की अनुमति है। बसंत पंचमी का पर्व यहां विशेष महत्व रखता है, क्योंकि इस दिन मां वाग्देवी की विशेष पूजा होती है। जब भी बसंत पंचमी शुक्रवार के आसपास या उसी दिन पड़ती है, तो दोनों पक्षों के समय प्रबंधन को लेकर प्रशासन के लिए चुनौती बढ़ जाती है। इसी संतुलन को बनाने के प्रयास में प्रशासन द्वारा लागू की गई नई व्यवस्थाओं पर अब सवाल उठने लगे हैं।