मध्य प्रदेश में वायु प्रदूषण की बिगड़ती स्थिति को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने कड़ा रुख अपनाया है। ट्रिब्यूनल ने प्रदेश के 8 प्रमुख शहरों में प्रदूषण के बढ़ते स्तर पर चिंता जताते हुए राज्य सरकार से जवाब मांगा है। एनजीटी ने इस मामले में संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर एक्शन टेकन रिपोर्ट (ATR) पेश करने का निर्देश दिया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, प्रदेश के भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर सहित कुल 8 शहरों में हवा की गुणवत्ता मानकों के अनुरूप नहीं पाई गई है। इन शहरों में प्रदूषण नियंत्रण के लिए चलाए जा रहे अभियानों के बावजूद अपेक्षित सुधार नहीं दिखने पर एनजीटी ने स्वत: संज्ञान लिया है।
सरकार से मांगी विस्तृत रिपोर्ट
एनजीटी की सेंट्रल बेंच ने राज्य शासन और मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से पूछा है कि इन शहरों में वायु गुणवत्ता सुधारने के लिए अब तक क्या ठोस कदम उठाए गए हैं। अदालत ने अधिकारियों से यह भी स्पष्ट करने को कहा है कि नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम (NCAP) के तहत निर्धारित लक्ष्यों को पूरा करने के लिए क्या प्रयास किए जा रहे हैं। ट्रिब्यूनल यह जानना चाहता है कि बजट आवंटन के बाद जमीनी स्तर पर क्या बदलाव आया है।
प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल
रिपोर्ट्स के मुताबिक, इन 8 शहरों में पार्टिकुलेट मैटर (PM 10 और PM 2.5) की मात्रा निर्धारित सीमा से अधिक दर्ज की जा रही है। इसका मुख्य कारण सड़कों की धूल, निर्माण कार्य और वाहनों से निकलने वाला धुआं माना जा रहा है। एनजीटी ने सख्त लहजे में पूछा है कि जब प्रदूषण के स्रोत चिन्हित हैं, तो उन पर प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं हो रही है।
सर्दियों से पहले चिंताजनक स्थिति
शीत ऋतु के आगमन के साथ ही उत्तर और मध्य भारत में प्रदूषण का स्तर बढ़ने लगता है। ऐसे समय में एनजीटी द्वारा मांगी गई यह रिपोर्ट काफी अहम मानी जा रही है। गौरतलब है कि इससे पहले भी एनजीटी ने राज्य सरकार को पर्यावरण नियमों का सख्ती से पालन कराने के निर्देश दिए थे। अब देखना यह होगा कि प्रशासन आगामी सुनवाई में क्या एक्शन प्लान पेश करता है।