नितिन नवीन नामांकन के लिए मुख्यालय नहीं आएंगे, अमित शाह–राजनाथ सिंह बनेंगे प्रस्तावक, दस्तावेज साइन होकर वापस होंगे जमा

बीजेपी अध्यक्ष चुनाव को लेकर पार्टी में हलचल तेज है और इसी कड़ी में नामांकन प्रक्रिया को लेकर एक अहम जानकारी सामने आई है। पार्टी की तय प्रक्रिया के तहत कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नवीन अपने नामांकन के लिए बीजेपी मुख्यालय नहीं आएंगे। इसे पार्टी की रणनीतिक और संगठनात्मक व्यवस्था का हिस्सा माना जा रहा है, जिससे यह संदेश भी जाता है कि प्रक्रिया पूरी तरह औपचारिक और सुव्यवस्थित तरीके से पूरी की जा रही है।

सूत्रों के मुताबिक, नितिन नवीन के नामांकन प्रस्ताव की जिम्मेदारी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व अपने हाथों में लेगा। खबर है कि गृहमंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह उनके प्रस्तावक के रूप में सामने आएंगे। इनके अलावा पार्टी के कुछ अन्य वरिष्ठ नेता भी प्रस्तावक की भूमिका निभाएंगे। यह कदम नितिन नवीन के प्रति शीर्ष नेतृत्व के भरोसे और समर्थन को साफ तौर पर दर्शाता है।

नामांकन की प्रक्रिया कुछ इस तरह होगी कि प्रस्तावकों द्वारा नितिन नवीन के नाम का प्रस्ताव विधिवत रूप से तैयार किया जाएगा। इसके बाद इस पूरे नामांकन प्रस्ताव का सेट बीजेपी मुख्यालय से सीधे नितिन नवीन तक भेजा जाएगा। पार्टी सूत्रों का कहना है कि यह व्यवस्था इसलिए की गई है ताकि प्रक्रिया में किसी तरह की औपचारिक बाधा न आए और समयबद्ध तरीके से नामांकन पूरा किया जा सके।

प्रस्ताव मिलने के बाद नितिन नवीन उस पर अपने हस्ताक्षर करेंगे और फिर वही दस्तावेज वापस पार्टी मुख्यालय भेज दिए जाएंगे। इसके बाद यह नामांकन प्रस्ताव चुनाव अधिकारी के समक्ष बीजेपी मुख्यालय में औपचारिक रूप से जमा किया जाएगा। यानी नितिन नवीन की अनुपस्थिति में भी पूरी चुनावी प्रक्रिया नियमों के तहत पूरी की जाएगी।

पार्टी के अंदरखाने में इसे एक सुविचारित रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। इससे एक ओर जहां शीर्ष नेतृत्व की एकजुटता का प्रदर्शन होता है, वहीं दूसरी ओर संगठन में यह संदेश भी जाता है कि अध्यक्ष चुनाव केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि अनुशासन और परंपरा के अनुसार संचालित होने वाली प्रक्रिया है।

कुल मिलाकर, नितिन नवीन का नामांकन भले ही उनकी व्यक्तिगत मौजूदगी के बिना हो, लेकिन प्रस्तावकों की सूची और अपनाई गई प्रक्रिया यह साफ कर देती है कि पार्टी नेतृत्व उनके नाम पर पूरी तरह सहमत और आश्वस्त है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि अध्यक्ष चुनाव की यह प्रक्रिया बीजेपी संगठन को किस दिशा में आगे ले जाती है।