बिहार की राजनीति में एक अहम घटनाक्रम सामने आ रहा है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार गुरुवार को राज्यसभा के लिए नामांकन दाखिल करने जा रहे हैं। यदि यह प्रक्रिया पूरी होती है, तो राज्य को नए मुख्यमंत्री की ओर बढ़ना पड़ सकता है। उल्लेखनीय है कि नीतीश कुमार अब तक कभी भी उच्च सदन यानी राज्यसभा के सदस्य नहीं रहे हैं। ऐसे में उनका यह कदम राजनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है और इसे सत्ता परिवर्तन की प्रस्तावना के रूप में देखा जा रहा है।
नामांकन में शामिल होंगे अमित शाह, बढ़ेगी सियासी हलचल
सूत्रों के अनुसार केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी इस मौके पर बिहार पहुंचेंगे और नामांकन प्रक्रिया के दौरान मौजूद रहेंगे। उनके साथ जेडीयू के नेता नितिन नवीन भी नामांकन दाखिल कर सकते हैं। नामांकन के तुरंत बाद जेडीयू विधायक दल की बैठक प्रस्तावित है, जिसमें सभी विधायक शामिल होंगे। माना जा रहा है कि इसी बैठक में नीतीश कुमार अपने इस्तीफे की औपचारिक घोषणा कर सकते हैं, जिससे नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया आधिकारिक रूप से शुरू हो जाएगी।
भाजपा की कोर ग्रुप बैठक और नए नेतृत्व की तलाश
बताया जा रहा है कि अमित शाह भाजपा के कोर ग्रुप के साथ बैठक कर आगे की रणनीति तय करेंगे। पार्टी एक पर्यवेक्षक नियुक्त कर सकती है, जो विधायक दल की बैठक में नए नेता का चयन सुनिश्चित करेगा। वही नेता मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। 2025 के विधानसभा चुनाव में एनडीए की 243 में से 202 सीटों पर जीत के बाद भाजपा 89 विधायकों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। इस बदले राजनीतिक संतुलन के कारण भाजपा के भीतर यह चर्चा तेज है कि अब मुख्यमंत्री पद पर उसका दावा स्वाभाविक है।
जेडीयू के भीतर मतभेद, सत्ता हस्तांतरण पर असहमति
राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि जेडीयू के भीतर इस संभावित बदलाव को लेकर एकमत स्थिति नहीं है। पार्टी का एक वर्ग सत्ता हस्तांतरण के खिलाफ बताया जा रहा है, जबकि दूसरा गुट राजनीतिक समीकरणों को ध्यान में रखते हुए बदलाव को स्वीकार करने के पक्ष में दिख रहा है। पटना स्थित मुख्यमंत्री आवास पर नीतीश कुमार, जेडीयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा और वरिष्ठ मंत्री विजय कुमार चौधरी के बीच बैठक ने इन अटकलों को और बल दिया है।
भाजपा में कई नामों की चर्चा, कौन होगा अगला चेहरा?
संभावित मुख्यमंत्री पद के दावेदारों में उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, वरिष्ठ नेता संजीव चौरसिया और केंद्रीय मंत्री नित्यानंद राय के नाम प्रमुखता से लिए जा रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा ने पहले भी गठबंधन धर्म निभाते हुए जेडीयू को मुख्यमंत्री पद दिया था, जबकि उसके पास अधिक सीटें थीं। लेकिन मौजूदा परिदृश्य में पार्टी अपनी संख्या और जनादेश के आधार पर नेतृत्व अपने हाथ में लेने की कोशिश कर सकती है।
‘नीतीश-पश्चात युग’ की आहट और नई रणनीति
विशेषज्ञों का मानना है कि बिहार अब एक “नीतीश-पश्चात युग” की ओर बढ़ रहा है। लंबे समय तक राज्य की राजनीति के केंद्र में रहे नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के बाद सत्ता समीकरण पूरी तरह बदल सकते हैं। भाजपा अपने संगठनात्मक बल और चुनावी प्रदर्शन को देखते हुए अब मुख्यमंत्री पद पर अपने नेता को स्थापित करने की रणनीति बना सकती है। आने वाले दिनों में होने वाली बैठकों और निर्णयों से स्पष्ट हो जाएगा कि बिहार की राजनीति किस दिशा में आगे बढ़ेगी।