नई दिल्ली/भोपाल: राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) ने मेडिकल शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण फैसला लिया है, जिससे मध्य प्रदेश के दशकों पुराने सरकारी मेडिकल कॉलेजों को बड़ी राहत मिली है। NMC ने उस नियम को खत्म कर दिया है जिसके तहत 15 साल से पुराने मेडिकल कॉलेज MBBS की सीटें नहीं बढ़ा सकते थे। इस फैसले के बाद अब प्रदेश के पुराने और प्रतिष्ठित कॉलेज भी अपनी क्षमता के अनुसार सीटों में वृद्धि के लिए आवेदन कर सकेंगे।
अब तक, एनएमसी के नियमों के अनुसार कोई भी मेडिकल कॉलेज अपने स्थापना के 15 साल बाद MBBS की सीटों में वृद्धि नहीं कर सकता था। इस वजह से मध्य प्रदेश के ग्वालियर, जबलपुर, भोपाल, इंदौर और रीवा जैसे कई पुराने और स्थापित मेडिकल कॉलेज चाहकर भी सीटें नहीं बढ़ा पा रहे थे। यह नियम इन कॉलेजों के विकास में एक बड़ी बाधा बना हुआ था।
प्रदेश के पुराने कॉलेजों के लिए खुले रास्ते
इस नियम के हटने से अब इन कॉलेजों के लिए सीटें बढ़ाने का रास्ता साफ हो गया है। राज्य सरकार प्रदेश में डॉक्टरों की कमी को दूर करने के लिए लगातार MBBS सीटें बढ़ाने का प्रयास कर रही है। अब ये पुराने कॉलेज भी इस मुहिम का हिस्सा बन सकेंगे। सीटें बढ़ाने की प्रक्रिया के तहत, कॉलेजों को एनएमसी के पास एक प्रस्ताव और शपथ पत्र जमा करना होगा। इसके बाद एनएमसी की टीम कॉलेज के बुनियादी ढांचे, जैसे लेक्चर हॉल, लैब, फैकल्टी और अन्य सुविधाओं का निरीक्षण करेगी। मानकों पर खरा उतरने पर सीटें बढ़ाने की अनुमति दी जाएगी।
ग्वालियर का 77 साल पुराना कॉलेज भी बढ़ा सकेगा सीटें
इस फैसले का सबसे बड़ा फायदा ग्वालियर के गजरा राजा मेडिकल कॉलेज (GRMC) जैसे संस्थानों को मिलेगा। 77 साल पुराना यह कॉलेज प्रदेश के सबसे पुराने मेडिकल कॉलेजों में से एक है, जहां वर्तमान में MBBS की 200 सीटें हैं। पुराने नियम के कारण यह कॉलेज सीटें नहीं बढ़ा पा रहा था। अब इस बाधा के हटने के बाद कॉलेज प्रबंधन ने 50 अतिरिक्त सीटों के लिए आवेदन करने की तैयारी शुरू कर दी है।
“यह एक स्वागत योग्य कदम है। हम लंबे समय से इसका इंतजार कर रहे थे। हमारे पास पर्याप्त बुनियादी ढांचा है और हम 50 सीटें बढ़ाने के लिए जल्द ही एनएमसी को प्रस्ताव भेजेंगे।” — डॉ. अक्षय निगम, डीन, जीआरएमसी
पीजी सीटों के अनुपात में भी बड़ा बदलाव
MBBS सीटों के अलावा, एनएमसी ने पोस्ट-ग्रेजुएट (PG) सीटों के नियमों में भी एक अहम बदलाव किया है। पहले MBBS और PG सीटों का अनुपात 1:2 था, यानी दो MBBS सीटों पर एक PG सीट होती थी। अब इस अनुपात को बदलकर 1:1 कर दिया गया है। इसका मतलब है कि अब हर एक MBBS सीट पर एक PG सीट हो सकती है। इस बदलाव से पुराने कॉलेजों में PG की सीटें बढ़ाने में भी मदद मिलेगी।
कुल मिलाकर, एनएमसी के इन फैसलों से मध्य प्रदेश में चिकित्सा शिक्षा को मजबूती मिलेगी। इससे न केवल राज्य में डॉक्टरों की संख्या बढ़ेगी, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में भी सुधार की उम्मीद है। यह कदम राज्य सरकार के ‘हर जिले में एक मेडिकल कॉलेज’ के लक्ष्य को प्राप्त करने में भी सहायक होगा।