राम नवमी के पावन अवसर पर उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में आस्था का अनूठा संगम देखने को मिला। शुक्रवार तड़के होने वाली विश्व प्रसिद्ध भस्म आरती में बाबा महाकाल का विशेष श्रीराम स्वरूप में भव्य शृंगार किया गया, जिसे देख श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।
महाकाल का वैष्णव स्वरूप और विशेष अनुष्ठान
उत्सव की शुरुआत मंदिर के सभा मंडप में वीरभद्र जी के समीप स्वस्ति वाचन और चांदी के द्वार खोलने के साथ हुई। परंपरा अनुसार, पुजारियों ने गर्भगृह के पट खोलकर भगवान का जलाभिषेक किया। इसके बाद दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस से बने पंचामृत से अभिषेक कर कर्पूर आरती की गई। नंदी हॉल में नंदी जी के विशेष पूजन के बाद मुख्य अनुष्ठान संपन्न हुए।
रजत आभूषणों से सजे ‘राम’
इस विशेष दिन पर बाबा महाकाल को वैष्णव तिलक लगाया गया और उन्हें रजत चंद्र, त्रिशूल, मुकुट व मुण्डमाल जैसे दिव्य आभूषण अर्पित किए गए। भांग, चंदन और सूखे मेवों के साथ फूलों की मालाओं से भगवान को सजाया गया। अंत में महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से भस्म अर्पित की गई। मान्यता है कि भस्म अर्पण के बाद महादेव साकार रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं।
इस दिव्य अलौकिक दृश्य का साक्षी बनने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचे और जय श्री महाकाल व जय श्री राम के उद्घोष से पूरा परिसर गूंज उठा।