ऑनलाइन शॉपिंग में धोखाधड़ी पड़ रही महंगी: इंदौर कंज्यूमर कोर्ट ने अमेज़न पर लगाया भारी जुर्माना

Indore News: ऑनलाइन शॉपिंग के दौर में ई-कॉमर्स कंपनियों की मनमानी पर लगाम कसते हुए जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, इंदौर ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है।

आयोग ने दिग्गज कंपनी अमेज़न (Amazon) को सेवा में कमी का दोषी पाते हुए ग्राहक को पूरी राशि ब्याज सहित लौटाने और मानसिक प्रताड़ना के लिए क्षतिपूर्ति देने का आदेश दिया है।

क्या था पूरा मामला?

इंदौर के वर्धमान नगर निवासी मयंक जैन ने अगस्त 2021 में अमेज़न के माध्यम से दो डिज़ाइनर लहंगा चोली ऑर्डर किए थे। इन उत्पादों की कुल कीमत 97,998 रुपये थी। जब पार्सल ग्राहक के पास पहुँचा, तो कपड़ों की गुणवत्ता और विवरण वेबसाइट पर दिखाए गए वादे के मुताबिक नहीं थे।

नियमों का पालन करते हुए उपभोक्ता ने उत्पाद वापस (Return) कर दिए, लेकिन इसके बावजूद अमेज़न ने उनकी राशि वापस नहीं की। बार-बार संपर्क करने और शिकायतों के बाद भी जब कोई समाधान नहीं निकला, तो मयंक जैन ने ‘जागरूक उपभोक्ता समिति’ के माध्यम से न्याय का दरवाजा खटखटाया।

आयोग की सख्त टिप्पणी और फैसला

प्रकरण की सुनवाई अध्यक्ष विकास राय, सदस्य कुंदन सिंह चौहान और डॉ. निधि बारंगे की पीठ द्वारा की गई। सुनवाई के दौरान आयोग की सदस्य डॉ. निधि बारंगे ने पाया कि कंपनी द्वारा दिए गए तर्क और दस्तावेज अपनी कमी को छुपाने के लिए पर्याप्त नहीं थे।

उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत आयोग ने अमेज़न को निम्नलिखित निर्देश दिए:

  • राशि की वापसी: कंपनी 45 दिनों के भीतर उपभोक्ता को उत्पादों की कुल राशि (लगभग 1 लाख रुपये) लौटाए।

  • ब्याज का भुगतान: इस राशि पर 21 दिसंबर 2021 से भुगतान की तिथि तक 9% वार्षिक ब्याज देना होगा।

  • मानसिक क्षतिपूर्ति: ग्राहक को हुई मानसिक परेशानी के लिए 10,000 रुपये का जुर्माना।

  • वाद व्यय: कानूनी कार्यवाही के खर्च के रूप में 5,000 रुपये अतिरिक्त देने होंगे।

उपभोक्ताओं के लिए क्यों है यह महत्वपूर्ण?

जागरूक उपभोक्ता समिति के अध्यक्ष मुकेश कुमार अमोलिया, जिन्होंने परिवादी का पक्ष रखा, ने इसे उपभोक्ताओं की बड़ी जीत बताया है। यह निर्णय स्पष्ट करता है कि ऑनलाइन कंपनियाँ कानून से ऊपर नहीं हैं।

यदि कोई ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म घटिया सामान भेजता है या रिफंड रोकने की कोशिश करता है, तो उपभोक्ता अपनी आवाज उठा सकते हैं।

यह फैसला ई-कॉमर्स जगत के लिए एक कड़ा संदेश है कि डिजिटल लेन-देन में पारदर्शिता और सेवा की गुणवत्ता अनिवार्य है, अन्यथा उन्हें भारी आर्थिक और कानूनी परिणाम भुगतने होंगे।