भगीरथपुरा जल संकट पर विपक्ष का हमला, BJP सरकार पर गंभीर आरोप

इंदौर के भगीरथपुरा वार्ड क्रमांक-11 में पेयजल में सीवेज की मिलावट से उत्पन्न भयावह हालात को लेकर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भाजपा सरकार को कटघरे में खड़ा किया है। दिसंबर 2025 के अंतिम सप्ताह से शुरू हुई इस घटना में अब तक 16 से अधिक लोगों की मौत, सैकड़ों नागरिकों के गंभीर रूप से बीमार होने और हजारों लोगों के प्रभावित होने की बात सामने आई है। विपक्ष का आरोप है कि वास्तविक आंकड़े सरकारी दावों से कहीं अधिक हैं और कई परिवारों ने नववर्ष का स्वागत शोक और मातम के बीच किया।

आकस्मिक हादसा नहीं, प्रशासनिक लापरवाही का नतीजा

नेता प्रतिपक्ष ने स्पष्ट कहा कि यह कोई अचानक हुआ हादसा नहीं, बल्कि वर्षों से चली आ रही प्रशासनिक अनदेखी और देरी का परिणाम है। मुख्य पेयजल पाइपलाइन के ऊपर बिना उचित सेप्टिक व्यवस्था के शौचालय बनाए गए थे। पाइपलाइन में लीकेज होने के कारण गंदा पानी सीधे घरों के नलों तक पहुंचा। महीनों से स्थानीय नागरिक दूषित पानी की शिकायतें कर रहे थे, लेकिन प्रशासन ने तब तक ठोस कदम नहीं उठाए, जब तक निर्दोष लोगों की जान नहीं चली गई।

नई पाइपलाइन का टेंडर वर्षों तक क्यों लटका रहा

विपक्ष ने पेयजल पाइपलाइन से जुड़े टेंडर में हुई देरी पर भी सवाल उठाए। नवंबर 2022 में नई पाइपलाइन का निर्णय लिया गया था और जनवरी 2023 में संबंधित विभागों को भेजा गया, लेकिन जुलाई 2025 में जाकर 2.4 करोड़ रुपये का टेंडर जारी हुआ। इसके बाद भी करीब पांच महीने तक कोई कार्यवाही नहीं हुई। विपक्ष का कहना है कि यदि समय रहते काम शुरू होता, तो यह त्रासदी टाली जा सकती थी।

निलंबन से नहीं होगी जवाबदेही तय

कुछ निचले स्तर के अधिकारियों के निलंबन को विपक्ष ने केवल डैमेज कंट्रोल करार दिया है। उनका कहना है कि बड़े फैसले लेने वाले अधिकारी और राजनीतिक जिम्मेदार अब भी सुरक्षित हैं। केवल छोटे कर्मचारियों पर कार्रवाई कर सरकार अपनी नैतिक जिम्मेदारी से नहीं बच सकती।

पूर्ण सत्ता के बावजूद संवेदनहीन रवैया

उमंग सिंघार ने कहा कि इंदौर ने भाजपा को हर स्तर पर भरपूर समर्थन दिया, लेकिन बदले में शहर को अव्यवस्था और उपेक्षा मिली। इतने बड़े जनादेश के बावजूद नागरिकों को सुरक्षित पेयजल तक उपलब्ध नहीं हो पाया। पीड़ितों के सवालों पर मंत्रियों की आपत्तिजनक टिप्पणियों पर भी कोई कार्रवाई नहीं की गई, जिसे विपक्ष ने दोहरा मापदंड बताया।

शोक के माहौल में सत्ता का असंवेदनशील व्यवहार

विपक्ष ने मुख्यमंत्री के सार्वजनिक कार्यक्रमों का जिक्र करते हुए कहा कि जब इंदौर में लोग अपनों को खोने का दर्द झेल रहे थे, उसी दौरान मंचों से हल्के-फुल्के बयान दिए जा रहे थे। नेता प्रतिपक्ष ने इसे जनभावनाओं के प्रति असंवेदनशील आचरण बताया, खासकर तब जब मुख्यमंत्री स्वयं इंदौर के प्रभारी मंत्री भी हैं।

स्वच्छता पुरस्कार और जमीनी सच्चाई का विरोधाभास

इंदौर लगातार आठ बार देश का सबसे स्वच्छ शहर घोषित हो चुका है और नगर निगम का बजट भी हजारों करोड़ रुपये का है। इसके बावजूद लोगों को नलों से साफ पानी नहीं मिल पा रहा। विपक्ष का कहना है कि ऐसे में स्वच्छता के पुरस्कार आम जनता के लिए व्यंग्य बनकर रह गए हैं।

स्वास्थ्य संकट में भी पारदर्शिता पर सवाल

विपक्ष ने आरोप लगाया कि अब तक नियमित स्वास्थ्य बुलेटिन जारी नहीं किए गए और मौतों व गंभीर मामलों के आंकड़े स्पष्ट नहीं हैं। मांग की गई है कि हर 12 घंटे में स्वास्थ्य स्थिति की जानकारी सार्वजनिक की जाए, ताकि स्थिति की वास्तविक तस्वीर सामने आ सके।

अधूरी सड़कें, ट्रैफिक और पुराने घोटालों का जिक्र

जल संकट के साथ-साथ शहर की जर्जर सड़कों, अधूरे फ्लाईओवर, ट्रैफिक जाम और ड्रेनेज घोटालों का मुद्दा भी उठाया गया। विपक्ष का आरोप है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद बुनियादी सुविधाओं की हालत बदतर बनी हुई है।

मुआवज़े पर भी सवाल, जवाबदेही की मांग

सरकार द्वारा घोषित 2 लाख रुपये की सहायता राशि को विपक्ष ने नाकाफी बताया। उनका कहना है कि मृतकों के परिजनों को कम से कम 1 करोड़ रुपये का मुआवज़ा और बीमार मजदूर परिवारों की मजदूरी की भरपाई की जानी चाहिए।

अंत में नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि जब तक दोषियों पर ठोस कार्रवाई, समयबद्ध सुधार और पूरी पारदर्शिता सुनिश्चित नहीं होती, तब तक यह संकट समाप्त नहीं माना जा सकता। विपक्ष पीड़ित नागरिकों के अधिकारों की लड़ाई पूरी ताकत से जारी रखेगा।