बहुत कम उपक्रम हैं जो हमारी आजादी से भी पुराने हैं। रेल, पुलिस, जेल ये सब तो अंग्रेजों ने किया ही, और ये बुनियादी जरूरतें भी थीं। पर कुछ ऐसे विभागों पर भी काम किया जो अलग थे। जैसे मौसम विभाग। इसकी स्थापना 1875 में हुई थी और अब 2025 में पूरे डेढ़ सौ साल हो गए।
हर मायने में मौसम विभाग ने लंबा सफर तय किया है। तब जब ये कहा जाता था कि अगर मौसम विभाग ने कह दिया है कि बारिश होगी तो फिर छाता लेकर जाने की जरूरत नहीं है, मान लीजिए कि नहीं होगी। आर के लक्ष्मण ने भी खूब कार्टून बनाए इस विषय पर।
तब से अब जब मौसम विभाग के पूर्वानुमान काफी हद तक सही साबित हो रहे हैं, एक लंबा सफर है। हालांकि यहां से आगे और तेज़ी से जाने की जरुरत है। अब मौसम की तब्दीलियां भी तेज़ हैं और इस विषय में किसान से लेकर आमजन तक सबकी रुचि भी बढ़ी है।
मौसम विभाग के 150 साल पूरे होने पर दिल्ली के भारत मंडपम में दो दिवसीय महती आयोजन हुआ। १४ जनवरी मकर संक्रांति को प्रधानमंत्री मोदी ने इसका उद्घाटन किया। कई विषयों पर अलग – अलग सत्रों में चर्चा हुई। आज, यानि १५ जनवरी को मौसम विभाग और मीडिया पर आयोजित चर्चा में पैनल पर उपस्थित होने का अवसर प्राप्त हुआ। बहुत अच्छी चर्चा हुई। मौसम विभाग के पूर्व महानिदेशक केलकर जी सूत्रधार थे।
महत्वपूर्ण बिंदू –
– मौसम से जुड़ी खबरों में लोगों की रुचि बहुत बढ़ गई है।
– विभाग को भी इससे हमकदम होने के लिए अपनी गति बढ़ानी होगी।
– सही और सटीक जानकारी का प्रवाह तेज़ होगा तो भ्रम फैलने वालों पर रोक लगेगी।
– अब लोग बहुत ही सीमित क्षेत्र के मौसम की भी जानकारी चाहते हैं, केवल राज्य या संभाग की नहीं।
इस सबके साथ ही मौसम विज्ञान को भारत के पारंपरिक ज्ञान से भी जुड़ना होगा, जो अपने आप में काफी समृद्ध है