भोपाल की पीपल्स यूनिवर्सिटी में गुरुवार सुबह उस समय सुरक्षा अलर्ट जारी करना पड़ा, जब यूनिवर्सिटी प्रशासन को एक संदिग्ध ईमेल मिला। ईमेल में दावा किया गया था कि मेडिकल कॉलेज परिसर में साइनाइड गैस वाले बम लगाए गए हैं और दोपहर 12:15 बजे विस्फोट होगा।
संदेश में यह भी लिखा गया कि सुबह 11 बजे तक डॉक्टरों और विद्यार्थियों को परिसर से बाहर कर दिया जाए। सूचना मिलते ही प्रबंधन ने पुलिस को खबर दी और एहतियातन कैंपस खाली कराया गया।
प्रशासनिक अधिकारियों के मुताबिक ईमेल यूनिवर्सिटी के डीन की आधिकारिक आईडी पर आया था। धमकी को गंभीर मानते हुए कक्षाएं, ओपीडी और प्रशासनिक ब्लॉकों से छात्रों, डॉक्टरों और स्टाफ को बाहर निकाला गया। इसके बाद पुलिस ने परिसर की घेराबंदी की और आने-जाने वाले रास्तों की निगरानी बढ़ाई।
बम निरोधक दस्ता और डॉग स्क्वॉड की जांच
घटना की सूचना के बाद बम निरोधक दस्ता, डॉग स्क्वॉड और स्थानीय पुलिस टीम मौके पर पहुंची। टीमों ने भवनों, पार्किंग, सार्वजनिक क्षेत्रों और संवेदनशील हिस्सों की चरणबद्ध तलाशी ली। जांच के दौरान किसी भी संदिग्ध पैकेट, विस्फोटक सामग्री या सक्रिय डिवाइस का पता नहीं चला। तय समय 12:15 बजे तक भी कोई विस्फोट नहीं हुआ।
सुरक्षा एजेंसियों ने परिसर में मौजूद तकनीकी और मैनुअल दोनों तरह की सर्च प्रक्रिया अपनाई। यूनिवर्सिटी प्रबंधन को सलाह दी गई कि जांच पूरी होने तक प्रवेश नियंत्रित रखा जाए और भीड़भाड़ वाले हिस्सों में अनावश्यक आवाजाही न हो।
ईमेल की भाषा और सामग्री पर अलग से जांच
पुलिस सूत्रों के अनुसार मेल में धार्मिक नारे का उल्लेख था और संदेश की भाषा में कई राजनीतिक व प्रशासनिक आरोप भी जोड़े गए थे। मेल करने वाले ने अपने को एक समूह से जुड़ा बताते हुए दावा किया कि “ट्विनिंग आईईडी” लगाए गए हैं।
संदेश में तमिलनाडु पुलिसकर्मियों के कथित शोषण, कुछ नामों और पुराने मामलों का भी जिक्र किया गया। साथ ही यह चेतावनी लिखी गई थी कि अगर विस्फोटक सक्रिय न हुए तो हमलावर परिसर में घुसकर आत्मघाती कार्रवाई कर सकते हैं।
जांच एजेंसियां इस सामग्री को धमकी की गंभीरता, संदेश के उद्देश्य और संभावित फर्जी दावों—तीनों कोणों से परख रही हैं। पुलिस का कहना है कि इस तरह के ईमेल में अक्सर भ्रामक, असंबंधित और उकसाऊ बातें मिलाई जाती हैं, इसलिए तकनीकी सत्यापन के बिना किसी दावे को सही नहीं माना जा सकता।
साइबर सेल ट्रेस कर रही है मेल की उत्पत्ति
साइबर सेल यह पता लगा रही है कि मेल किस आईडी से भेजा गया, उसका आईपी और सर्वर लोकेशन क्या है, और भेजने के लिए किसी वीपीएन या प्रॉक्सी का इस्तेमाल हुआ या नहीं। ईमेल हेडर, रूटिंग डेटा और लॉग्स की फॉरेंसिक जांच शुरू कर दी गई है। जरूरत पड़ने पर इंटर-स्टेट एजेंसियों से भी तकनीकी मदद ली जाएगी।
प्रारंभिक स्तर पर यह संभावना भी देखी जा रही है कि मामला शरारत या फर्जी धमकी का हो सकता है। हालांकि पुलिस ने स्पष्ट किया है कि जब तक हर कोण की पुष्टि न हो जाए, इसे सामान्य घटना की तरह नहीं लिया जाएगा।
कैंपस और आसपास के इलाकों में सतर्कता
धमकी की खबर फैलते ही यूनिवर्सिटी परिसर और आसपास के क्षेत्र में कुछ समय के लिए अफरा-तफरी का माहौल रहा। कई अभिभावकों ने छात्रों की सुरक्षा को लेकर जानकारी मांगी। प्रबंधन ने बताया कि निकासी प्रक्रिया नियंत्रित तरीके से की गई और प्राथमिकता अस्पताल सेवाओं व छात्रों की सुरक्षित मूवमेंट को दी गई।
घटना के बाद यूनिवर्सिटी प्रशासन ने आंतरिक सुरक्षा प्रोटोकॉल की समीक्षा शुरू की है। आधिकारिक ईमेल खातों पर निगरानी, संदिग्ध संचार की त्वरित रिपोर्टिंग और आपात स्थिति में निकासी अभ्यास को और मजबूत करने पर चर्चा हुई। पुलिस ने भी संस्थान को सलाह दी है कि किसी अनजान मेल, लिंक या अटैचमेंट पर तुरंत साइबर टीम को अलर्ट करें।
फिलहाल मामले में कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है। पुलिस ने कहा है कि तकनीकी जांच के आधार पर जिम्मेदार व्यक्ति या समूह की पहचान होते ही कानूनी कार्रवाई की जाएगी। जांच पूरी होने तक सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट मोड में रहेंगी और यूनिवर्सिटी परिसर में अतिरिक्त निगरानी जारी रहेगी।