Petrol Diesel Price: वाहन चालकों की हो गई बल्ले-बल्ले, डीजल 5 रुपए सस्ता, पेट्रोल की कीमत में भी बड़ी राहत, यहां देखें लेटेस्ट रेट

Petrol Diesel Price: वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव जारी है, जिसका असर स्थानीय बाजार पर भी साफ दिखाई दे रहा है। पेट्रोल-डीजल के रेट में उतार-चढ़ाव के कारण आम जनता महंगाई से राहत की उम्मीद लगाए बैठी थी। पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने से दैनिक उपभोग की वस्तुओं और आवश्यक सामानों की कीमतों में भी फर्क देखा जाता है। इस बीच, सरकार ने आम लोगों को राहत देते हुए पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कटौती की है, जिससे परिवहन और आवश्यक वस्तुओं की लागत में कमी आने की संभावना है। इससे न केवल आम उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी, बल्कि महंगाई पर भी कुछ हद तक नियंत्रण संभव हो सकेगा।

वित्त मंत्रालय के आदेश के अनुसार, सरकार ने डीजल की कीमत में 5.31 रुपए की कटौती की है, जबकि पेट्रोल के दाम में मामूली रूप से 0.50 पैसे की कमी की गई है। इसके साथ ही केरोसिन के दाम में भी 3.53 रुपए की गिरावट दर्ज की गई है। यह फैसला खासतौर पर रमजान से पहले लिया गया है, जिससे आम जनता को राहत मिल सके। ईंधन की कीमतों में इस कमी से परिवहन लागत घटने की उम्मीद है, जिससे दैनिक उपभोग की वस्तुओं के दामों पर भी सकारात्मक असर पड़ सकता है।

जारी अधिसूचना के अनुसार, पेट्रोल की कीमत में 0.50 रुपए प्रति लीटर की कमी के बाद अब इसकी नई कीमत 255.63 रुपए प्रति लीटर हो गई है। वहीं, हाई-स्पीड डीजल के दाम में 5.31 रुपए प्रति लीटर की कटौती की गई है, जिससे इसकी कीमत घटकर 258.64 रुपए प्रति लीटर हो गई है। इसके अलावा, केरोसिन तेल की कीमत में भी 3.53 रुपए की गिरावट दर्ज की गई है, जिससे अब इसकी नई कीमत 168.12 रुपए प्रति लीटर हो गई है। ईंधन की कीमतों में इस कमी से आम जनता को कुछ हद तक राहत मिलने की उम्मीद है।

सरकार पेट्रोल और हाई-स्पीड डीजल (एचएसडी) पर लगभग 76 रुपए प्रति लीटर कर वसूलती है, जिसमें 60 रुपए प्रति लीटर का पेट्रोलियम विकास शुल्क (पीडीएल) शामिल होता है, जबकि सामान्य बिक्री कर (जीएसटी) शून्य रहता है। इसके अलावा, अधिकारी दोनों उत्पादों पर 16 रुपए प्रति लीटर का अतिरिक्त सीमा शुल्क लगाते हैं, चाहे वे स्थानीय रूप से उत्पादित हों या आयातित। पेट्रोल निजी परिवहन, छोटे वाहनों, मोटरसाइकिलों और रिक्शा के लिए एक प्रमुख ईंधन है, जो मध्यम और निम्न-मध्यम वर्ग के उपभोक्ताओं के लिए आवश्यक वस्तु बनाता है। इसकी कीमत में किसी भी प्रकार की वृद्धि सीधे घरेलू बजट को प्रभावित करती है और पहले से ही मुद्रास्फीति से जूझ रहे लोगों पर अतिरिक्त बोझ डालती है।