राजेश राठौर
exclusive
स्वतंत्र समय, इंदौर
इंदौर की लगभग 300 से ज्यादा कालोनियां में दो-तीन सौ प्लाट हैंं, लेकिन दिक्कत यह है कि उनमें मकान नहीं बन पाए, प्रापर्टी ( property ) में मंदी आने का एक बड़ा कारण ये भी है। जब लोगों ने देखा कि शहर से दूर 10-15 किलोमीटर आगे कालोनियां तो कट गईं लेकिन उनका विकास नहीं होने और बिल्डिंग परमिशन नहीं आने के कारण लोग परेशान हैं, सुरक्षा की गारंटी भी नहीं है, इस कारण लोगों ने मकान नहीं बनाए।
property की तेजी के दौर में खरीदे प्लॉट
प्रापर्टी ( property ) में तेजी के दौर में हर कोई प्लाट खरीदने के लिए भाग-दौड़ कर रहा था। एक वक्त तो ऐसा आया था जब लोग यह कहते थे कि यदि एक-दो कालोनी में प्लाट नहीं लिए तो भविष्य में हम प्लाट नहीं खरीद पाएंगे। अभी से इतनी दूर कालोनियां कट रही हैं, आगे जाकर तो और दूर कालोनियां कटेंगी, ऐसे में अब प्लाट लेना जरूरी है। प्लाट खरीदी की भगदड़ में जिसको जहां मिला, वहां प्लाट खरीद लिया। न तो ये देखा कि कालोनाइजर कौन है, न ही ये देखा कि कालोनी में डेवलपमेंट हुआ या नहीं, बिल्डिंग परमिशन मिली है या नहीं। कालोनाइजरों और प्रापर्टी दलालों ने इस मौके का भरपूर दुरुपयोग किया। कालोनाइजरों ने डायरियों पर प्लाट काट दिए। सुरक्षा की हालत तो इतनी ज्यादा खराब है कि दुरस्थ कालोनियों में लूट-पाट हो रही है। लोगों को आने-जाने के लिए लोक परिवहन की सुविधा भी नहीं मिल पाती, इसके अलावा कालोनियों में आए दिन ड्रेनेज समस्या से लेकर पानी तक की दिक्कत हो जाती है।