राजेश राठौर
Exclusive
स्वतंत्र समय, भोपाल
ग्लोबल इन्वेस्टर समिट के कारण भोपाल पधारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ( PM Modi ) ने कई राजनीतिक इशारे किए है, जिसको समझना जरूरी है। सबसे पहले तो उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का बार-बार नाम लेकर तारीफ की। इसके साथ ही ये भी कहा कि मध्यप्रदेश में इन्वेस्टमेंट करने का सबसे सही समय है और यही समय है। सवाल इस बात का उठता है कि मध्यप्रदेश में सरकार तो बीजेपी की 20 साल से है लेकिन अचानक ऐसा क्या हुआ कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ये कह दिया कि मध्यप्रदेश इंडस्ट्री के मामले में देश के कई राज्यों की तुलना में आगे है, हर मामले में यहां अच्छा काम हो रहा है। हालांकि उन्होंने दिग्विजय सरकार के बारे में भी कहा कि उस समय सडक़, पानी, बिजली की हालत खराब थी, अब सबकुछ बदल गया है।
PM Modi ने किसी भी सीएम का नहीं किया इतना यशोगान
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ( PM Modi ) कई भाजपा शासित राज्यों में जाकर ग्लोबल समिट का उद्घाटन करते रहे हैं, लेकिन कभी भी उन्होंने किसी भाजपा के मुख्यमंत्री का इतना यशोगान नहीं किया, जितना सोमवार को मुख्यमंत्री मोहन यादव का किया। इसके अलावा आखिर क्या कारण था कि मोदी ने उद्योगपतियों से यह कहा कि मध्यप्रदेश में ही निवेश करने का सबसे सही समय है। जिस हिसाब से नरेंद्र मोदी ने डा. यादव की तारीफ की है उसको देखकर ये कहा जा सकता है कि ‘अंगद के पैर’ की तरह डा. यादव अपनी पारी शानदार तरीके से खेलेंगे। इसके अलावा ये बात भी समझ में आ गई कि मध्यप्रदेश में ज्यादा से ज्यादा उद्योग लगें ताकि मोहन यादव सरकार और मजबूत हो। यादव ने पहला साहसिक फैसला ये लिया कि इंदौर की बजाय ग्लोबल समिट भोपाल में करा दी। सच भी है, किसी एक शहर में ही बार-बार समिट क्यों हो। हो सकता है कि अगली समिट उज्जैन, ग्वालियर या जबलपुर में हो। इसके अलावा छोटी रीजनल समिट करके मुख्यमंत्री ने एक नई शुरुआत तो की है। जिस तरीके से भोपाल को सजाया गया, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहली बार यहां रात रुके, वो भी राज भवन में, इसका जिक्र भी मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने भाषण में किया। दिल्ली से जो लाइन डा. यादव को मिली है उसी लाइन पर सबकुछ हो रहा है।
मुख्यमंत्री के भाजपा में जो विरोधी हैं वो भी अब समझ गए होंगे, उनका चुप रहना ही बेहतर है। डा. यादव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जिस तरीके से दिल जीता, ये उनकी सालभर में सबसे बड़ी राजनीतिक सफलता है। समिट के उद्घाटन में मोदी आए और समापन में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह आ रहे हैं। जो दो लोग देश चला रहे हैं, जो भाजपा चला रहे हैं, यदि उनके प्रियपात्र डा. यादव बन गए हैं तो फिर सबको राजनीतिक संदेश समझ जाना चाहिए।
इंडस्ट्री के मामले में यह पहली बार हुआ कि सिर्फ ठोस प्रस्ताव पर ही अनुबंध हुए। पहले जिस तरीके से चाहे जिससे अनुबंध हो जाते थे और बाद में पता नहीं चलता था कि इन्वेस्टर कहां चला गया। कल कुछ अनुबंध तो ऐसे हुए जो रजिस्टर्ड हुए हैं, बकायदा स्टाम्प पेपर पर लिखा-पढ़ी हुई है। जिनको जमीन दी जा रही है उनसे हर हालत में कहा जा रहा है कि टाइमलिमिट में फैक्टरी चालू करना पड़ेगी। इस तरह के ठोस और बुनियादी नीति के कारण डा. मोहन यादव सफलता जरूर पाएंगे। जिस तरह से उद्योगपतियों से दो टूक शब्दों में कहा कि यदि काम करना है तो मध्यप्रदेश आ जाओ, यहां आने के बाद काम शुरू भी करना पड़ेगा, स्थानीय लोगों को नौकरी देना पड़ेगी।
उज्जैन के महाकाल लोक से लेकर कई धार्मिक स्थलों को शानदार बनाकर धार्मिक पर्यटन की संख्या में लगातार इजाफा होना भी मोहन यादव की सफलता मानी जा सकती है। हर सेक्टर में मोहन यादव लगातार काम करते जा रहे हैं। जिस तरीके से डा. यादव लगातार जनता के बीच भी सक्रिय हो रहे हैं उस हिसाब से उनकी लोकप्रियता भी जनता में बढ़ती जा रही है।
तबादला उद्योग जैसे कामों से दूर रहकर डा. यादव ने साफ संकेत दिए है कि जो जरूरी होगा, उसी का तबादला होगा, बाकी अपना काम करते रहें। डा. यादव हिंदूवादी नेता की छवि के रूप में भी लगातार उभरते जा रहे हैं। मुस्लिम मोहल्लों और गांव के नाम बदलकर राष्ट्रवीरों के नाम पर किए जा रहे हैं। मोदी की मौजूदगी में ग्लोबल समिट के दौरान अलग अंदाज में जो कार्यक्रम हुआ वो भी चौकाने वाला था। मंच पर कोई कुर्सियां नहीं थी, सब नीचे बैठ थे। मंच से सिर्फ यादव और प्रधानमंत्री मोदी का भाषण हुआ। राजनीतिक रूप से अब सब समझ गए हैं कि साल भर में यादव के फैसले असर करते हुए दिखाई दे रहे हैं। यदि प्रधानमंत्री मध्यप्रदेश को महत्व दे रहे हैं तो इसका मतलब साफ है कि डा. यादव को ताकत दे रहे है। कुल मिलाकर सारे मामले स्पष्ट हैं कि आखिर चल क्या रहा है।